मानदेय भुगतान में देरी के साथ पीएफ राशि दिलाने की मांग, ईएसआई कार्ड और एरियर का मुद्दा भी उठाया
अलवर। चिकित्सा महाविद्यालय में प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से कार्यरत संविदा कार्मिकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जिला कलक्टर को आवेदन सौंपा। कार्मिकों ने मानदेय का समय पर भुगतान कराने के साथ पिछले करीब 10 माह से पीएफ राशि जमा नहीं कराने का आरोप लगाया है।
कार्मिकों के अनुसार उन्हें प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से नियुक्त किया गया है और उनका प्रतिमाह 7,410 रुपये मानदेय निर्धारित है। उनका कहना है कि इसमें नियमानुसार 12 प्रतिशत राशि की कटौती के बाद उन्हें करीब 6,521 रुपये का भुगतान किया जाता है।
पीएफ कटौती के बावजूद खाते में राशि जमा नहीं होने का आरोप
संविदा कार्मिकों ने आवेदन में आरोप लगाया कि पिछले करीब 10 माह से उनके मानदेय से पीएफ की राशि काटी जा रही है, लेकिन संबंधित प्लेसमेंट एजेंसी की ओर से यह राशि उनके पीएफ खातों में जमा नहीं कराई गई।
कार्मिकों का कहना है कि लंबे समय से पीएफ राशि जमा नहीं होने के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। साथ ही पीएफ से जुड़े सरकारी लाभों का लाभ मिलने में भी परेशानी हो रही है।
7 तारीख तक मानदेय देने की मांग
कार्मिकों ने मानदेय भुगतान में देरी का मुद्दा भी जिला कलक्टर के समक्ष उठाया। उनका कहना है कि उन्हें हर महीने की 15 से 20 तारीख के बीच मानदेय का भुगतान किया जाता है।
उन्होंने मांग की है कि प्लेसमेंट एजेंसी को नियमानुसार महीने की 7 तारीख तक मानदेय का भुगतान करने के लिए पाबंद किया जाए, ताकि कर्मचारियों को समय पर आर्थिक भुगतान मिल सके।
ईएसआई कार्ड और एरियर भुगतान भी लंबित
आवेदन में संविदा कार्मिकों ने बताया कि उन्हें अभी तक ईएसआई कार्ड भी उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसके अलावा उनका बकाया एरियर भी लंबित बताया गया है।
कार्मिकों ने जिला प्रशासन से इन सभी समस्याओं का समाधान कराने की मांग की है, ताकि उन्हें निर्धारित सुविधाएं और भुगतान समय पर मिल सकें।
ब्याज सहित पीएफ राशि दिलाने की मांग
संविदा कार्मिकों ने मांग की है कि उनके वेतन से अब तक काटी गई पीएफ राशि की पूरी गणना कर संबंधित पीएफ खातों में जमा कराई जाए। साथ ही यदि राशि जमा कराने में देरी हुई है तो नियमानुसार ब्याज सहित भुगतान दिलाने की मांग भी की गई है।
समाधान नहीं होने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
कार्मिकों ने कहा कि यदि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो वे मजबूरन श्रम न्यायालय की शरण लेंगे और आगे की कानूनी कार्रवाई करेंगे।
कार्मिकों ने जिला प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर प्लेसमेंट एजेंसी के स्तर पर लंबित भुगतान और पीएफ से संबंधित समस्या का नियमानुसार समाधान कराने की मांग की है।
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