जिला परिषद के बाहर प्रदर्शन तेज
अलवर। अलवर जिले में पंचायती राज मंत्रालयिक कर्मचारियों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। पंचायती राज मंत्रालयिक कर्मचारी संगठन के बैनर तले कर्मचारियों ने जिला परिषद कार्यालय के बाहर धरना जारी रखा। लंबे समय से लंबित पड़ी वरिष्ठता सूची जारी नहीं होने से नाराज कर्मचारियों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और जल्द समाधान की मांग उठाई।
धरने पर बैठे कर्मचारियों का कहना है कि विभाग में वर्षों से कार्यरत मंत्रालयिक कार्मिकों की वरिष्ठता सूची अब तक जारी नहीं की गई है, जिससे पदोन्नति, वेतन विसंगतियां और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि बार-बार ज्ञापन देने और अधिकारियों से वार्ता करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे कार्मिकों में गहरा असंतोष व्याप्त है।
पदोन्नति का लाभ नहीं मिल सका है
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि वरिष्ठता सूची जारी न होने से कई कर्मचारी अपने वैधानिक अधिकारों से वंचित हो रहे हैं। कुछ कर्मचारी सेवानिवृत्ति के करीब हैं, लेकिन उन्हें अब तक पदोन्नति का लाभ नहीं मिल सका है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
धरने के दौरान कर्मचारियों ने जिला प्रशासन के माध्यम से राज्य सरकार को ज्ञापन भी भेजा। ज्ञापन में मांग की गई है कि लंबित वरिष्ठता सूची को प्राथमिकता के आधार पर जारी किया जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए समयबद्ध प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में मंत्रालयिक कर्मचारी मौजूद रहे। कर्मचारियों ने एकजुटता दिखाते हुए कहा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे मंत्रालयिक संवर्ग के सम्मान और अधिकारों की है। संगठन के नेताओं ने कहा कि जब तक लिखित आश्वासन और ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक धरना जारी रहेगा।
उधर, जिला परिषद प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है, हालांकि सूत्रों के अनुसार वरिष्ठता सूची के मसले पर विभागीय स्तर पर प्रक्रिया चल रही है। कर्मचारियों का कहना है कि वे आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे और केवल ठोस आदेश जारी होने पर ही आंदोलन समाप्त करेंगे।
धरने के चलते जिला परिषद परिसर के बाहर दिनभर हलचल बनी रही। पुलिस प्रशासन ने एहतियातन व्यवस्था संभाले रखी, हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन कब तक कर्मचारियों की मांगों पर निर्णय लेता है और आंदोलन का समाधान किस रूप में निकलता है।
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