अलवर के नगली सर्कल स्थित सोलंकी अस्पताल की कैंटीन में मिलावटी और बासा भोजन परोसने की शिकायत पर फूड विभाग ने छापा मारा। सैंपल जांच के लिए भेजे गए, रिपोर्ट आने पर होगी कार्रवाई।
मिशनसच न्यूज, अलवर।
अलवर शहर के नगली सर्कल क्षेत्र में स्थित सोलंकी अस्पताल एक बार फिर सुर्खियों में है। अस्पताल की कैंटीन में मरीजों को मिलावटी, बासा और निम्न गुणवत्ता का भोजन परोसे जाने की शिकायत पर सोमवार को फूड विभाग की टीम ने अचानक छापामार कार्रवाई की। शिकायत मिलते ही विभाग सक्रिय हुआ और बिना पूर्व सूचना के अस्पताल में पहुंचकर कैंटीन की खाद्य सामग्री, स्वच्छता और भोजन की गुणवत्ता की व्यापक जांच की।
फूड इंस्पेक्टर केशव गोयल ने बताया कि विभाग को सूचना मिली थी कि अस्पताल में भर्ती मरीजों को दिया जाने वाला खाना न केवल बासा है, बल्कि उसकी गुणवत्ता मानकों के अनुरूप भी नहीं है। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर इस प्रकार की लापरवाही स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। इसी कारण शिकायत की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए त्वरित कार्रवाई की गई।
छापे के दौरान फूड विभाग की टीम ने कैंटीन में मौजूद तैयार भोजन के साथ-साथ मसालों, खाद्य तेल, दाल, सब्जी, पानी और अन्य खाद्य सामग्री के नमूने एकत्र किए। टीम ने किचन में सफाई व्यवस्था, भोजन बनाने की प्रक्रिया, उपयोग किए जा रहे बर्तनों, स्टोरेज यूनिट और समग्र स्वच्छता की भी जांच की। कई जगह गंदगी और अव्यवस्था देखने को मिली, जिसके बाद टीम ने नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
टीम द्वारा लिए गए सारे खाद्य सैंपल आगे जांच के लिए जयपुर स्थित फूड लैब भेज दिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी और यदि मिलावट या निम्न गुणवत्ता की पुष्टि होती है तो संबंधित संचालकों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसमें भारी जुर्माना, लाइसेंस निलंबन या रद्दीकरण तक शामिल हो सकता है।
अस्पताल में अचानक हुई इस कार्रवाई से प्रबंधन में हड़कंप मच गया। कई कर्मचारी मौके पर सफाई देने और प्रक्रिया को छिपाने का प्रयास करते भी दिखे, लेकिन फूड विभाग की टीम ने सारे तथ्यों को मौके पर ही दर्ज कर लिया। अस्पताल में मौजूद मरीजों और उनके परिजनों ने कार्रवाई को सही दिशा बताते हुए राहत की भावना जाहिर की। उनका कहना था कि अस्पताल में दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता सीधे मरीजों के स्वास्थ्य से जुड़ी होती है, इसलिए ऐसे स्थलों पर सख्ती जरूरी है।
कुछ परिजनों ने बताया कि कई बार खाने में बदबू या स्वाद की गड़बड़ी महसूस होती थी लेकिन शिकायत करने पर कोई सुनवाई नहीं होती थी। अब विभागीय जांच शुरू होने से उनको उम्मीद है कि खाने की गुणवत्ता में सुधार होगा।
फूड इंस्पेक्टर केशव गोयल ने स्पष्ट कहा—
“शिकायत गंभीर थी। हमने मौके पर पहुंचकर सभी खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही कार्रवाई तय होगी, लेकिन किसी भी स्थिति में मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
फिलहाल फूड विभाग की यह कार्रवाई शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग मांग कर रहे हैं कि अन्य अस्पताल कैंटीनों और बड़े होटलों में भी इसी प्रकार की सख्त जांच होनी चाहिए, ताकि मिलावटखोरों पर अंकुश लगाया जा सके।
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