क्षमता विकास प्रशिक्षण में आत्मचिंतन और नेतृत्व रहा केंद्र, राजेन्द्र सिंह ने सामाजिक समर्पण का दिया संदेश
जलपुरुष राजेंद्र सिंह से पृथ्वी दिवस पर की गई बातचीत सुनने के लिए लिंक पर क्लिक करें – https://youtu.be/eFyIlEfYNWY?si=h6pxJL7tzCcvbnzg
जयपुर । तरुण भारत संघ (तभासं) द्वारा आयोजित क्षमता विकास प्रशिक्षण श्रृंखला के द्वितीय चरण के अंतर्गत “आत्मचिंतन, नवचेतना एवं पुनः उन्मुखीकरण” विषय पर तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। प्रशिक्षण का उद्देश्य संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं एवं सदस्यों की व्यक्तिगत, सामाजिक और व्यावसायिक क्षमताओं का विकास करते हुए उन्हें संगठन के मूल उद्देश्यों और मूल्यों के प्रति अधिक प्रतिबद्ध एवं प्रभावी बनाना था।
जलपुरुष राजेन्द्र सिंह ने दिया प्रेरक संदेश
प्रशिक्षण के दौरान देश के प्रख्यात जल संरक्षण विशेषज्ञ राजेन्द्र सिंह ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति की सफलता का आधार स्पष्ट लक्ष्य, निरंतर आत्मचिंतन और समाज के प्रति समर्पित दृष्टिकोण होता है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपनी आंतरिक क्षमताओं को पहचानकर सकारात्मक सोच और दृढ़ संकल्प के साथ कार्य करता है, तब वह अपने लक्ष्य की प्राप्ति अवश्य करता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे व्यक्तिगत विकास को सामाजिक परिवर्तन से जोड़ते हुए जनहित के कार्यों में संवेदनशीलता, ईमानदारी और समर्पण के साथ अपनी भूमिका निभाएं।
संवाद, नेतृत्व और आत्ममूल्यांकन पर रहा विशेष जोर
प्रशिक्षण में तरुण भारत संघ के विभिन्न कार्यक्षेत्रों से जुड़े सदस्यों और कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विभिन्न सत्रों में प्रतिभागियों ने आत्ममूल्यांकन करते हुए अपने अनुभव साझा किए तथा अपनी क्षमताओं, चुनौतियों और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की।
संवादात्मक गतिविधियों, समूह चर्चाओं और व्यवहारिक अभ्यासों के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपने व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता तथा संगठनात्मक दायित्वों को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर प्राप्त किया।
नेतृत्व विकास सहित कई विषयों पर हुआ मंथन
प्रशिक्षण के दौरान नेतृत्व विकास, आत्मचिंतन, स्वयं का मूल्यांकन, सकारात्मक दृष्टिकोण, प्रभावी संवाद, टीम भावना, संगठनात्मक उत्तरदायित्व तथा व्यक्तिगत एवं सामूहिक नेतृत्व जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से मार्गदर्शन दिया।
विशेषज्ञों ने कहा कि किसी भी संगठन की सफलता उसके सदस्यों की आंतरिक प्रतिबद्धता, सामूहिक सोच और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति पर निर्भर करती है। प्रतिभागियों को अपनी क्षमताओं की पहचान कर उन्हें समाज और संगठन के उद्देश्यों के अनुरूप उपयोग में लाने के लिए प्रेरित किया गया।
ज्ञान और नेतृत्व क्षमता को मिली नई दिशा
तीन दिवसीय प्रशिक्षण के समापन पर प्रतिभागियों ने इसे अत्यंत प्रेरणादायक और उपयोगी बताया। उनका कहना था कि इस प्रशिक्षण से उनके ज्ञान, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और संगठनात्मक उत्तरदायित्व बोध को नई दिशा मिली है। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के नियमित आयोजन की आवश्यकता जताई।
उल्लेखनीय है कि यह क्षमता विकास प्रशिक्षण श्रृंखला “सक्षम – क्षमता विकास परियोजना” के ज्ञान सहयोग से संचालित की जा रही है। इसके अंतर्गत विशेषज्ञों द्वारा व्यवहारिक, सहभागितापूर्ण और अनुभव-आधारित प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, ताकि संगठन के कार्यकर्ताओं की दक्षता और नेतृत्व क्षमता का निरंतर विकास हो सके।
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