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    आधे घंटे की बारिश में किशनगढ़बास जलमग्न, 80 लाख की नाला सफाई पर उठे सवाल

    जलभराव ने खोली नगर पालिका की व्यवस्था की पोल, अतिक्रमण हटाने के आदेशों पर कार्रवाई नहीं होने से बढ़ी परेशानी

    किशनगढ़बास। मानसून से पहले नालों की सफाई पर करीब 80 लाख रुपये खर्च किए जाने के दावों की मंगलवार को हुई करीब आधे घंटे की बारिश ने पोल खोल दी। हल्की अवधि की बारिश में ही शहर की गंज रोड, मुख्य बाजार, गली-मोहल्लों और विभिन्न आवासीय कॉलोनियों की सड़कें जलमग्न हो गईं। बारिश बंद होने के बाद भी कई घंटों तक सड़कों पर पानी भरा रहा, जिससे आमजन, दुकानदारों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    शहर में जल निकासी के प्राकृतिक मार्गों और नालों पर हुए अतिक्रमण को लेकर न्यायालय एवं प्रशासन की ओर से कार्रवाई के निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद नगर पालिका और सार्वजनिक निर्माण विभाग की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होने पर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि हर वर्ष मानसून में यही स्थिति बनती है, लेकिन समस्या की मूल वजह को दूर करने की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे।

    नगर पालिका ने मानसून से पहले नालों की सफाई के लिए करीब 80 लाख रुपये खर्च किए जाने का दावा किया था। हालांकि पहली तेज बारिश में ही गंज रोड, मुख्य बाजार, आवासीय कॉलोनियों और निचले इलाकों में पानी की निकासी बाधित हो गई। कई स्थानों पर सड़कें पानी से लबालब हो गईं और लोगों का पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया। दुकानदारों को भी जलभराव के कारण घंटों परेशानी झेलनी पड़ी।

    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नालों और पानी निकासी के मार्गों पर अतिक्रमण होने से पानी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया है। इसके कारण थोड़ी सी बारिश में भी पानी सड़कों और आबादी वाले क्षेत्रों में भर जाता है। लोगों ने सवाल उठाया कि यदि नालों की सफाई पर इतनी बड़ी राशि खर्च की गई है, तो पहली ही बारिश में शहर के हालात इतने खराब क्यों हो गए।

    उल्लेखनीय है कि पानी निकासी के रास्तों पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजीत कुड़ी ने पिछले सप्ताह जिला कलेक्टर, नगर पालिका और पीडब्ल्यूडी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। साथ ही 27 जुलाई तक तथ्यात्मक रिपोर्ट भी मांगी गई थी। इसके बावजूद अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने की बात सामने आई है।

    इसके अलावा उपखंड अधिकारी ने भी उच्चतम न्यायालय के आदेशों की पालना सुनिश्चित कराने के लिए नगर पालिका और पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के साथ बैठक कर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके संबंधित विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    स्थानीय व्यापारियों और शहरवासियों ने मांग की है कि न्यायालय एवं प्रशासन के निर्देशों की प्रभावी पालना करते हुए नालों और जल निकासी मार्गों से अतिक्रमण तत्काल हटाया जाए। साथ ही शहर में स्थायी और वैज्ञानिक जल निकासी व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि हर वर्ष होने वाले जलभराव से लोगों को राहत मिल सके।

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