जन गोष्ठी : पराधीनता के काल और विपरीत परिस्थितियों में भी देशभक्ति का भाव कभी कम नहीं हुआ
अलवर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रकाश जी ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि पराधीनता के काल और विपरीत परिस्थितियों में भी देशभक्ति का भाव कभी कम नहीं हुआ।
उन्होंने केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि छोटी उम्र से ही उनमें देशभक्ति की भावना दृढ़ होती गई। उस समय स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए विभिन्न प्रयास चल रहे थे, जिनमें कांग्रेस द्वारा अहिंसा और क्रांतिकारियों द्वारा हिंसा का मार्ग अपनाया गया। लेकिन राष्ट्रचरित्र, आपसी फूट और व्यक्तिगत अपेक्षाओं के कारण समाज को एकजुट करने की आवश्यकता महसूस हुई।
प्रकाश जी ने कहा कि देश को सच्चे देशभक्तों की जरूरत है और इसी उद्देश्य से व्यक्ति निर्माण की दिशा में कार्य प्रारंभ किया गया। उन्होंने बताया कि शाखा के माध्यम से संगठन निर्माण की शुरुआत हुई, जिसे लेकर प्रारंभ में संदेह जताया गया, लेकिन आज उसका परिणाम सबके सामने है।
उन्होंने कहा कि समाज को संगठित करना ही धर्म है और धर्मनिरपेक्षता का सही अर्थ यह है कि जैसा हम अपने लिए सोचते हैं, वैसा ही दूसरों के लिए भी संवेदनशील रहें। यही हिंदुत्व का मूल भाव है, जिसमें प्राणी मात्र को अपना माना जाता है।
प्रकाश जी ने जनसंख्या संतुलन, सामाजिक एकता और राष्ट्रहित के विषयों पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि सज्जन शक्ति के जागृत होने से ही देश आगे बढ़ता है और राष्ट्र को कमजोर करने वाली शक्तियों को कमजोर करना आवश्यक है।
उन्होंने शिक्षा में परिवर्तन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इसके परिणाम आने वाले 30-35 वर्षों में स्पष्ट दिखाई देंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत का हर गांव पहले आत्मनिर्भर और एक प्रकार से गणराज्य के रूप में कार्य करता था, जिससे समाज समृद्ध और कौशलयुक्त बना।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन उपस्थित रहे और राष्ट्र निर्माण के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।
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