जन विचार मंच ने उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव रोकने, ओबीसी को शामिल करने और प्रभावी दंड व्यवस्था लागू करने पर दिया जोर
मिशनसच न्यूज, अलवर। जन विचार मंच से जुड़े कार्यकर्ताओं ने रविवार को शहर के कंपनी गार्डन में “यूजीसी कानून 2026 की हकीकत और हंगामा” विषय पर परिचर्चा आयोजित की। कार्यक्रम में वक्ताओं ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के समता संवर्धन विनियम 2026 को और अधिक व्यापक, स्पष्ट तथा मजबूत बनाकर जल्द लागू करने की मांग की।
परिचर्चा के दौरान प्रतिभागियों ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में सामाजिक समता सुनिश्चित करने के लिए सख्त और प्रभावी कानून समय की आवश्यकता है। मेडिकल, तकनीकी शिक्षा संस्थान, आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी भेदभाव की घटनाओं पर कठोर रोकथाम के लिए ठोस प्रावधान किए जाने चाहिए।
मंच सचिव प्रो. रमेश बैरवा ने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु) विनियम 2026 को और स्पष्ट तथा मजबूत बनाकर लागू किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि 2012 के यूजीसी समता संवर्धन कानून में चिन्हित जातिगत भेदभाव के विभिन्न स्वरूपों को दोबारा स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाए, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके।
वक्ताओं ने रोहित एक्ट की मांग के अनुरूप जातिगत भेदभाव को कठोर दंडनीय अपराध घोषित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। साथ ही अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के साथ शिक्षण संस्थानों एवं नौकरियों में हो रहे भेदभाव को देखते हुए उन्हें भी यूजीसी कानून के दायरे में शामिल करने का पुरजोर समर्थन किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि शिक्षा में समान अवसर और भेदभावमुक्त वातावरण ही समाज की वास्तविक प्रगति का आधार है। परिचर्चा के माध्यम से सरकार से समता आधारित नीति लागू करने की मांग दोहराई गई।
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