आयोजन में पक्के रागों पर भजन प्रस्तुति, ढ़पाली परंपरा को मिला नया जीवन
कठूमर। कस्बे में शास्त्रीय और लोक-संगीत की समृद्ध परंपरा को जीवंत करते हुए रविवार को ‘ढ़पाली राग’ का भव्य आयोजन किया गया। इस आयोजन का संचालन रामवतार खंडेलवाल मास्टर द्वारा किया गया, जिसमें क्षेत्र के विभिन्न गांवों की टीमों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में बसेठ, सुंडियाना, जावली नगर और कठूमर की टीमों के कलाकारों—जगदीश सिंह, नरेश सैनी, शिवप्रताप सिंह, दुलीचंद, रघुनाथ प्रसाद शर्मा, राम खंडेलवाल और अशोक खटीक—ने अपनी प्रस्तुतियों से माहौल को संगीतमय बना दिया।
ढ़पाली राग में नगाड़ों की स्वर-ताल के साथ प्रस्तुत किए गए पक्के रागों पर आधारित भजनों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। गायकों की साधना और मधुर स्वर लहरियों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
आयोजन में बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी और ग्रामीण उपस्थित रहे, जिन्होंने तालियों के माध्यम से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। देर शाम तक चले इस कार्यक्रम ने क्षेत्र में सांस्कृतिक उत्साह का संचार किया।
आयोजक रामवतार खंडेलवाल ने बताया कि ढ़पाली राग लोक-शास्त्रीय संगीत की एक प्राचीन परंपरा है, जो धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है। ऐसे आयोजनों का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना और कलाकारों को मंच प्रदान करना है।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने भविष्य में भी इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया।
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