सोडावास में नशा रोकथाम को लेकर बैठक, अभिभावकों से बच्चों पर नजर रखने और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने की अपील
सोडावास। मुंडावर उपखंड के गांवों में कम उम्र के बच्चों में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों ने चिंता जताई है। इसी मुद्दे को लेकर सोडावास में एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें 12 से 16 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को नशीले पदार्थों से दूर रखने और गांव से शहर तक व्यापक जागरूकता अभियान चलाने पर मंथन किया गया।
बैठक में वक्ताओं ने बच्चों में चिट्टा (स्मैक), गांजा, अफीम, गुटखा, तंबाकू, नशीली सिरप सहित अन्य मादक पदार्थों की ओर बढ़ते रुझान को गंभीर सामाजिक चिंता का विषय बताया। इस समस्या से निपटने के लिए जागरूक नागरिकों की टीम गठित कर लोगों को जागरूक करने तथा अभिभावकों को विशेष रूप से सतर्क रहने की अपील की गई।
दोस्तों का दबाव और गलत सामग्री को बताया चिंता का कारण
सामाजिक कार्यकर्ता सुमन वीरेंद्र चौधरी चिरूनी ने कहा कि बच्चों में नशे की शुरुआत के पीछे कई सामाजिक और पारिवारिक कारण हो सकते हैं। उन्होंने दोस्तों का दबाव, खाली समय, मोबाइल पर अनुपयुक्त सामग्री और पारिवारिक मार्गदर्शन की कमी को प्रमुख चिंताओं में शामिल बताया।
उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे नशे को शुरुआत में मामूली प्रयोग के रूप में लेते हैं, लेकिन लगातार सेवन की स्थिति में यह आदत का रूप ले सकता है। इसका असर बच्चों की पढ़ाई, परिवार और सामाजिक जीवन पर पड़ने की आशंका रहती है।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि नशे से जुड़े मामलों को केवल कानून-व्यवस्था का विषय मानने के बजाय बच्चों और परिवारों के स्तर पर भी जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
खेल और कौशल विकास से जोड़ने पर जोर
बैठक में स्कूलों, अभिभावकों और समाज के संयुक्त प्रयास से बच्चों को खेल, कौशल विकास और अन्य सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने की अपील की गई।
वक्ताओं ने कहा कि किशोर उम्र में बच्चों को सही दिशा और उचित मार्गदर्शन मिलना जरूरी है। परिवार बच्चों की दिनचर्या, संगति और व्यवहार में होने वाले बदलावों पर ध्यान देकर समय रहते संवाद स्थापित कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चों को नशे से दूर रखने के लिए केवल रोक-टोक के बजाय उन्हें शिक्षा, खेल, रचनात्मक गतिविधियों और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने का आह्वान
बैठक में किसान महापंचायत के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रोहिताश बोहरा ने लोगों से अपने आसपास नशे से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बच्चों में किसी प्रकार का बदलाव दिखाई देने पर परिवार और समाज को समय रहते उनके साथ संवाद करना चाहिए।
बैठक में गांवों में जागरूकता अभियान चलाने, अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने और नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी देने पर जोर दिया गया।
सामूहिक प्रयास से बच्चों को बचाने की अपील
वक्ताओं ने कहा कि बच्चे समाज और देश का भविष्य हैं। उन्हें नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए परिवार, विद्यालय और समाज को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी।
बैठक में मौजूद लोगों ने गांव-गांव जागरूकता पहुंचाने और बच्चों को नशे से दूर रखने के लिए सकारात्मक माहौल तैयार करने की आवश्यकता पर सहमति जताई।
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