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    Homeराजस्थानखैरथलकल कांग्रेस से बगावत… आज भाजपा के खेवनहार

    कल कांग्रेस से बगावत… आज भाजपा के खेवनहार

    विक्रम चौधरी ने कांग्रेस से भाजपा प्रत्याशी के रूप में सभापति पद के लिए भरा नामांकन, खैरथल की सियासत में रातोंरात बदले समीकरण

    मनीष मिश्रा, खैरथल। नगर परिषद सभापति चुनाव से ठीक पहले खैरथल की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है। कल शाम तक कांग्रेस में सभापति पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे विक्रम चौधरी ने पाला बदलते हुए भाजपा का दामन थाम लिया और आज सुबह भाजपा प्रत्याशी के रूप में सभापति पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया। कुछ ही घंटों में हुए इस घटनाक्रम से शहर की सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    बुधवार को नगर परिषद खैरथल में पार्षद पद की शपथ लेने के बाद विक्रम चौधरी पूर्व विधायक रामहेत यादव और भाजपा के अन्य नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ सभापति पद के लिए नामांकन दाखिल करने पहुंचे। इस दौरान भाजपा खेमे में उत्साह नजर आया।

    नामांकन दाखिल करने के बाद मीडिया से बातचीत में पूर्व विधायक रामहेत यादव और विक्रम चौधरी भाजपा का बोर्ड बनने को लेकर आश्वस्त नजर आए। विक्रम चौधरी के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद शहर में तरह-तरह की राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

    जिले के मुद्दे को बनाया सियासी आधार

    मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए विक्रम चौधरी ने कहा कि कांग्रेस में रहते हुए वे जिले की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे और अब इस लड़ाई को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा की ओर से उन्हें खैरथल जिले को यथावत रखने का आश्वासन मिला है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिले का दर्जा बनाए रखने के लिए वे आगे भी हरसंभव प्रयास करेंगे।

    कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के कारणों पर विक्रम चौधरी ने कहा कि कांग्रेस में स्थानीय स्तर पर कुछ ऐसे लोग प्रभावी हैं, जिनके कारण लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं हो रही थी। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक कांग्रेस की सेवा करने के बावजूद उन्हें वह स्थान और सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे।

    विक्रम चौधरी के अनुसार, स्थानीय स्तर पर कुछ लोग टिकट वितरण और संगठन से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण निर्णयों में प्रभावी भूमिका निभाते हुए योग्य कार्यकर्ताओं को आगे आने से रोक रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी नाराजगी कांग्रेस कार्यकर्ताओं से नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर पार्टी में चल रही ऐसी व्यवस्थाओं और निर्णय प्रक्रिया से है।

    अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कल तक कांग्रेस खेमे में सभापति पद के दावेदार और आज भाजपा के सभापति प्रत्याशी बने विक्रम चौधरी के इस सियासी कदम का नगर परिषद के बोर्ड गठन पर क्या असर पड़ेगा? 45 वार्डों वाली परिषद में सभापति पद के लिए बने नए राजनीतिक समीकरण खैरथल की सत्ता की दिशा तय करने में कितने प्रभावी साबित होंगे, इस पर शहर की निगाहें टिकी हैं।

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