पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण विषय पर विशेष जानकारी प्रदान की गई
किशनगढ़ बास। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अलवर के निर्देशन में किशनगढ़ बास स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में एक विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण विषय पर विशेष जानकारी प्रदान की गई।
इस अवसर पर तालुका विधिक सेवा समिति, किशनगढ़ बास से जुड़े पीएलवी सूरज भान कछवाहा ने छात्राओं एवं शिक्षिकाओं को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण आज के समय की सबसे अहम चुनौतियों में से एक है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन, अनियंत्रित औद्योगीकरण, तेजी से बढ़ती जनसंख्या और वनों की अंधाधुंध कटाई के कारण हमारा पर्यावरण गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है।
सूरज कछवाहा ने छात्राओं को जागरूक करते हुए कहा, “पर्यावरण संतुलन के लिए वृक्षारोपण आवश्यक है, लेकिन इसके प्रति जागरूकता की कमी के कारण वृक्षारोपण अपेक्षा से बहुत कम हो रहा है।” उन्होंने उपस्थित छात्राओं को बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण आमजन की सहायता हेतु सदैव तत्पर है और किसी भी सहायता के लिए नालसा की हेल्पलाइन 15100 पर संपर्क किया जा सकता है।
“सृजन की सुरक्षा योजना” पर विशेष जानकारी
शिविर के दौरान राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं वन विभाग द्वारा संचालित ‘सृजन की सुरक्षा योजना – 2025’ के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। सूरज कछवाहा ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2025 में जन्म लेने वाली प्रत्येक बालिका के परिवार द्वारा कम से कम 11 पौधे लगाए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में स्थापित करना है।
इन पौधों की देखभाल सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से सुनिश्चित की जाएगी, जिसमें नवजात बालिका के परिवार के साथ-साथ स्थानीय महिला समूहों की भी भागीदारी होगी। योजना के तहत पौधों की उपलब्धता और देखभाल की व्यवस्था वन विभाग द्वारा की जाएगी। साथ ही, हर नवजात बालिका को एक विशेष “हरित बालिका पहचान पत्र” भी जारी किया जाएगा, जो उसे इस वृक्षारोपण अभियान से जोड़ेगा।
विद्यालय परिवार की सक्रिय भागीदारी
इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. मंजू यादव, समस्त शिक्षकगण, पीएलवी गुलाब शर्मा तथा विद्यालय की सैकड़ों छात्राएं उपस्थित रहीं। सभी ने पर्यावरण संरक्षण हेतु सामूहिक जागरूकता की भावना को अपनाने और “सृजन की सुरक्षा” जैसी अभिनव योजनाओं को सफल बनाने का संकल्प लिया।
शिविर का समापन सामूहिक चर्चा और प्रेरक संदेशों के साथ हुआ, जिसमें पर्यावरणीय संवेदनशीलता को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की अपील की गई।