आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी के सान्निध्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, बौद्धिक संपदा, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और पर्यावरण चेतना के समन्वय संगोष्ठी पर विद्वानों ने रखे विचार
केशोरायपाटन। परम पूज्य आर्यिका श्री 105 स्वस्तिभूषण माताजी के पावन सान्निध्य में राजस्थान के केशोरायपाटन में ज्ञान सागर विज्ञान फाउंडेशन की ओर से अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में आध्यात्मिकता, आधुनिक तकनीक, नैतिक मूल्यों और पर्यावरण चेतना के समन्वय के माध्यम से टिकाऊ एवं संतुलित जीवन की अवधारणा पर विमर्श हुआ।
संगोष्ठी का विषय आध्यात्मिक और सतत जीवन के लिए बौद्धिक संपदा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और पारिस्थितिक चेतना का समन्वय : एक जैन दृष्टिकोण रहा। इसमें आधुनिक वैज्ञानिक और तकनीकी विकास को जैन दर्शन के मूल्यों तथा जीवन-दृष्टि के संदर्भ में समझने पर जोर दिया गया।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में धर्म की प्रासंगिकता पर व्याख्यान
कार्यक्रम में अतिथि वक्ता के रूप में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सामाजिक माध्यमों के युग में धर्म और समाज: नैतिकता, सामाजिक संस्थाएँ और सामाजिक परिवर्तन विषय पर विचार प्रस्तुत किए गए। व्याख्यान में बताया गया कि तेजी से बदलते तकनीकी परिवेश में धर्म और नैतिक मूल्यों की भूमिका को नए संदर्भों में समझना आवश्यक है।
विचार-विमर्श के दौरान तकनीकी बदलावों के बीच सामाजिक जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों, नैतिक उत्तरदायित्व और समाज में स्थापित संस्थाओं की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
नैतिक मूल्यों और सामाजिक परिवर्तन पर मंथन
संगोष्ठी में धर्म की समकालीन प्रासंगिकता, नैतिकता, सामाजिक संस्थाओं और सामाजिक परिवर्तन के विभिन्न आयामों पर विमर्श हुआ। आधुनिक तकनीक के उपयोग के साथ मानवीय संवेदनाओं, जिम्मेदारी और पर्यावरण के प्रति चेतना बनाए रखने की आवश्यकता भी विषय के केंद्र में रही।
ज्ञान सागर विज्ञान फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस संगोष्ठी ने जैन दर्शन की दृष्टि से आधुनिक तकनीक, सामाजिक जीवन और सतत विकास के बीच संबंधों पर विचार रखने का अवसर प्रदान किया।
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