कोटा के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बाघिन MT-7 को हार्ड रिलीज किया गया। राजस्थान की पहली ‘रिवाइल्ड’ बाघिन अब खुले जंगल में शिकार और विचरण कर रही है
कोटा। राजस्थान के कोटा स्थित मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक सुखद खबर सामने आई है। लंबे समय से एंक्लोजर (बाड़े) में बंद बाघिन MT-7 को अब खुले जंगल में ‘हार्ड रिलीज’ कर दिया गया है। करीब डेढ़ साल तक कैद में रहने के बाद यह बाघिन अब मुकुंदरा की वादियों में स्वच्छंद विचरण कर सकेगी।
बाघिन MT-7 राजस्थान की ऐसी पहली बाघिन है जिसे ‘रिवाइल्ड’ किया गया है। इसका अर्थ है कि अनाथ होने के कारण शिकार की कला न सीख पाने वाली इस बाघिन को वन्यजीव विशेषज्ञों ने खुद शिकार करना सिखाया है। विशेषज्ञों की देखरेख में इसे जंगली परिवेश के लिए तैयार किया गया है।
मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर सुगनाराम जाट के अनुसार, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) से निर्देश मिलने के बाद बाघिन को जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया पूरी की गई।
- निगरानी: जंगल में छोड़े जाने के बाद से ही बाघिन की रेडियो टेलीमेट्री और कैमरा ट्रैप के जरिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
- अनुकूलन: शुरुआती अवलोकन में यह देखा गया है कि बाघिन सफलतापूर्वक शिकार कर रही है और उसका व्यवहार पूरी तरह प्राकृतिक है।
बाघिन MT-7 की कहानी काफी संघर्षपूर्ण रही है:
वर्ष 2023: रणथंभौर में अपनी मां (बाघिन टी-114) की मृत्यु के बाद MT-7 और उसका भाई अनाथ हो गए थे।
बायोलॉजिकल पार्क: महज ढाई महीने की उम्र में इन्हें कोटा के आभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क लाया गया।
स्थानांतरण: बाद में नर शावक को रामगढ़ विषधारी और मादा शावक (MT-7) को मुकुंदरा भेजा गया।
प्रशिक्षण: मुकुंदरा में उसे पहले 5 हेक्टेयर और फिर 21 हेक्टेयर के छोटे बाड़ों में रखकर शिकार का प्रशिक्षण दिया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि MT-7 की सफल ‘रिवाइल्डिंग’ राजस्थान में वन्यजीव संरक्षण और बाघ पुनर्वास की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। इससे भविष्य में अनाथ वन्यजीवों के पुनर्वास के नए रास्ते खुल सकते हैं।
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