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    खैरथल में चुनाव बाद सियासत गर्म, बाजारों में पसरी चिंता; व्यापारियों ने तीन दिन बंद का लिया निर्णय

    रामधन प्रकरण से लेकर पुलिस की मॉक ड्रिल तक उठे सवाल, व्यापारी बोले—चुनाव लोकतंत्र का उत्सव है, भय का माहौल नहीं

    विशेष रिपोर्ट | मनीष मिश्रा, खैरथल। नगर परिषद चुनाव के बाद सभापति की कुर्सी को लेकर चल रही सियासी खींचतान अब शहर के आम जनजीवन पर भी असर डालती नजर आ रही है। चुनाव परिणाम के बाद जहां पार्षदों के समर्थन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं, वहीं दूसरी ओर शहर में बने माहौल को लेकर आमजन और व्यापारी वर्ग में चिंता दिखाई दे रही है। गुरुवार रात सामने आए पार्षद रामधन से जुड़े कथित अपहरण प्रकरण और इसके बाद अनाज मंडी क्षेत्र में पुलिस की मॉक ड्रिल ने माहौल को और चर्चा में ला दिया।

    स्थिति यह है कि व्यापारियों ने अपनी सुरक्षा और शहर के माहौल को लेकर शनिवार से सोमवार तक तीन दिन बाजार बंद रखने का निर्णय लिया है। विभिन्न व्यापारिक यूनियनों का कहना है कि यह बंद किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में नहीं, बल्कि मौजूदा परिस्थितियों को लेकर उनकी चिंता और असुरक्षा की भावना के विरोध में है।

    रामधन प्रकरण में आरोप-प्रत्यारोप से बढ़ी बेचैनी

    गुरुवार रात भाजपा की ओर से कांग्रेस के सभापति प्रत्याशी ओमप्रकाश रोघा सहित नवनिर्वाचित पार्षद सुमित रोघा और पंकज रोघा सहित अन्य के खिलाफ कांग्रेस के वार्ड नंबर 3 पार्षद रामधन के कथित अपहरण को लेकर मामला दर्ज कराया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार रामधन के परिजनों की ओर से भी इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी।

    हालांकि इसके बाद रामधन के पिता और परिवार के सदस्यों ने मीडिया के सामने अलग पक्ष रखते हुए कहा कि रामधन का किसी ने अपहरण नहीं किया है। उनके अनुसार वह अपनी इच्छा से गया है और सुरक्षित है। परिवार ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव में मामला दर्ज कराया गया।

    यानी एक ही घटना को लेकर सामने आए अलग-अलग दावों ने शहर में चर्चा और असमंजस को और बढ़ा दिया है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि पुलिस जांच में वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।

    अनाज मंडी में पुलिस की मॉक ड्रिल से भी सहमे व्यापारी

    इधर अनाज मंडी क्षेत्र में पुलिस की ओर से बाहरी जवानों के साथ मॉक ड्रिल किए जाने की घटना ने भी व्यापारियों और आम लोगों का ध्यान खींचा। पुलिस की ओर से की गई ऐसी कार्रवाई सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा हो सकती है, लेकिन मौजूदा चुनावी तनाव के बीच अचानक बड़ी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी देखकर कई व्यापारी और नागरिक चिंतित नजर आए।

    व्यापारियों का कहना है कि सुरक्षा के लिए पुलिस की मौजूदगी जरूरी है, लेकिन ऐसी कार्रवाई से आमजन में भय नहीं, भरोसा पैदा होना चाहिए।

    व्यापार करने आए हैं, डर के माहौल में नहीं

    किराना यूनियन अध्यक्ष नवल लखानी ने कहा कि व्यापारियों में इस समय असुरक्षा की भावना है। उनका कहना है कि शहर में ऐसा माहौल उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। इसी चिंता के चलते यूनियन ने शनिवार से सोमवार तक अपने प्रतिष्ठान बंद रखने का निर्णय लिया है।

    मोबाइल यूनियन अध्यक्ष तरुण निहालानी ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि व्यापारियों और प्रतिष्ठित लोगों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर शहर में असंतोष है। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों के विरोध में यूनियन ने स्वैच्छिक बंद का निर्णय लिया है।

    सब्जी मंडी यूनियन अध्यक्ष धर्मदास ने भी चुनाव होने तक मंडी बंद रखने के निर्णय की जानकारी दी। वहीं इलेक्ट्रिक एंड मशीन यूनियन के अध्यक्ष राजकुमार लालवानी ने भी अपनी यूनियन की ओर से बंद में सहयोग देने की बात कही है।
    ऑटो पार्ट्स, टेलर सहित अन्य व्यापारिक संगठनों ने भी अपने स्तर पर बंद के समर्थन की जानकारी सोशल मीडिया और पत्रों के माध्यम से साझा की है।

    नई अनाज मंडी भी 2 दिन तक रहेगी बंद

    व्यापार समिति अध्यक्ष आयुष गोयल ने बताया कि बाजार बंद के समर्थन में नई अनाज मंडी में भी शनिवार रविवार अवकाश रखा गया है!

    यूनियनों का दावा—किसी राजनीतिक दबाव में नहीं लिया फैसला

    बंद में शामिल विभिन्न व्यापारिक यूनियनों के अध्यक्षों ने एक बात स्पष्ट रूप से कही है कि यह निर्णय स्वैच्छिक है। उनके अनुसार किसी राजनीतिक दल, नेता या अन्य व्यक्ति के दबाव में बाजार बंद नहीं किया जा रहा है।
    व्यापारियों का कहना है कि चुनाव में किसकी जीत होती है और सभापति कौन बनता है, यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया से तय होना चाहिए। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया के दौरान शहर में कानून-व्यवस्था और आम नागरिक की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की आशंका पैदा नहीं होनी चाहिए।

    राजनीतिक दलों के लिए भी खैरथल का संदेश

    खैरथल में इस समय असली चिंता सिर्फ सभापति की कुर्सी को लेकर नहीं, बल्कि शहर के माहौल को लेकर भी है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही बहुमत जुटाने की राजनीतिक कोशिश में हैं। ऐसे में दोनों दलों के सामने चुनौती सिर्फ संख्या जुटाने की नहीं, बल्कि अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आम नागरिकों में विश्वास बनाए रखने की भी है।
    जनता का संदेश साफ है—सियासत अपनी जगह है, लेकिन शहर का अमन, व्यापार और आम आदमी की सुरक्षा सबसे ऊपर है।

    सभापति की कुर्सी पर कौन बैठेगा, इसका फैसला 21 सितंबर को पार्षदों के मतदान से होगा। लेकिन उससे पहले खैरथल जिस माहौल से गुजर रहा है, उसने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या सत्ता की इस सियासी लड़ाई के बीच शहर का आम आदमी खुद को सुरक्षित और सहज महसूस कर पा रहा है?

    अब निगाहें प्रशासन, पुलिस और दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों पर हैं कि वे चुनावी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण बनाए रखने के साथ-साथ शहरवासियों में भरोसा कैसे कायम करते हैं।

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