नाम वापसी के बाद तस्वीर साफ, 23 के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए दोनों दलों की कवायद तेज; 21 सितंबर को होगा फैसला
मनीष मिश्रा, खैरथल। नगर परिषद चुनाव के बाद अब खैरथल सभापति की कुर्सी को लेकर सियासी तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है। शुक्रवार को नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही सभापति पद का मुकाबला अब सीधे भाजपा और कांग्रेस के बीच रह गया है। निर्दलीय प्रत्याशी सर्वेश गुप्ता और सुमित रोघा ने अपने नामांकन वापस ले लिए, जबकि स्क्रूटनी के दौरान नवल सिंह का नामांकन निरस्त हो चुका था। ऐसे में अब सभापति की कुर्सी के लिए भाजपा के विक्रम सिंह और कांग्रेस के ओमप्रकाश रोघा आमने-सामने हैं।

भाजपा से विक्रम सिंह, कांग्रेस ने ओमप्रकाश रोघा पर जताया भरोसा
भाजपा ने वार्ड नंबर 31 से निर्वाचित पार्षद विक्रम सिंह को सभापति पद का प्रत्याशी बनाया है। वहीं कांग्रेस ने वार्ड नंबर 37 से पार्षद का चुनाव हार चुके ओमप्रकाश रोघा को मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने सभापति चुनाव में हाइब्रिड फार्मूले के तहत ओमप्रकाश रोघा को प्रत्याशी बनाया है।
विक्रम सिंह के कांग्रेस से भाजपा में आने के बाद सभापति चुनाव की सियासत ने पहले ही नया मोड़ ले लिया था। अब नाम वापसी के बाद मुकाबला दो प्रत्याशियों के बीच सिमटने से राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं।
45 वार्ड, बहुमत के लिए 23 पार्षद जरूरी
खैरथल नगर परिषद में कुल 45 वार्ड हैं। सभापति पद के चुनाव में बहुमत साबित करने के लिए 23 पार्षदों का समर्थन जरूरी होगा। नगर परिषद चुनाव परिणाम में कांग्रेस के खाते में 20 पार्षद आए हैं, जबकि भाजपा 8 सीटों पर जीत दर्ज कर सकी। इसके अलावा 17 निर्दलीय पार्षद भी चुनाव जीतकर आए हैं, जिनकी भूमिका सभापति चुनाव में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भाजपा की ओर से सभापति चुनाव के लिए पर्याप्त समर्थन होने का दावा किया जा रहा है। वहीं कांग्रेस से भाजपा में आए विक्रम सिंह की ओर से भी उनके साथ 10 अन्य पार्षदों के आने का दावा किया गया है। हालांकि समर्थन को लेकर किए जा रहे दावों की वास्तविक स्थिति 21 सितंबर को होने वाली वोटिंग के बाद ही स्पष्ट होगी।
नज़र निर्दलीयों पर
कांग्रेस के पास 20 पार्षद थे लेकिन विक्रम चौधरी के भाजपा में जाने के बाद गणित बिगड़ गया अब रोघा ग्रुप के निर्दलीय पार्षदों के सहयोग से कांग्रेस बहुमत साबित कर सकती है ! दोनों ही दल बहुमत का आंकड़ा हासिल करने के लिए अपने-अपने पक्ष में समर्थन जुटाने में सक्रिय हैं।
सभापति चुनाव में 17 निर्दलीय पार्षदों की भूमिका इसलिए भी अहम हो गई है, क्योंकि 23 के बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए दोनों दलों को अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता है। ऐसे में आने वाले दिन खैरथल की स्थानीय राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
पांच दावेदारों ने दाखिल किए थे नामांकन
सभापति पद के लिए नामांकन प्रक्रिया के दौरान कुल पांच दावेदारों ने नामांकन दाखिल किया था। स्क्रूटनी में नवल सिंह का नामांकन निरस्त हो गया। इसके बाद नाम वापसी के अंतिम दिन निर्दलीय प्रत्याशी सर्वेश गुप्ता और सुमित रोघा ने भी अपने नाम वापस ले लिए।
अब सभापति पद की जंग में सिर्फ दो चेहरे बचे हैं—भाजपा के विक्रम सिंह और कांग्रेस के ओमप्रकाश रोघा। दोनों प्रत्याशियों के बीच होने वाले इस सीधे मुकाबले में किसे कितने पार्षदों का समर्थन मिलता है, इसका फैसला 21 सितंबर को मतदान के बाद होगा।
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