योग सत्र में प्रशिक्षिका जाहावी दीक्षित ने बताया जीवन दर्शन, आत्मानुशासन और संतुलित जीवनशैली का महत्व
लक्ष्मणगढ़। तहसील क्षेत्र के ग्राम खोहरा मलावली स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों के लिए योगाभ्यास सत्र आयोजित किया गया। आयुष्मान आरोग्य मंदिर खोहरा से जुड़ी योग प्रशिक्षिका जाहावी दीक्षित ने विद्यार्थियों को विभिन्न योगासन और प्राणायाम का अभ्यास कराया तथा नियमित योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।
विद्यालय की प्रधानाचार्य संगीता जाट ने बताया कि योग सत्र में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दौरान विद्यार्थियों को योग के शारीरिक लाभों के साथ-साथ इसके आध्यात्मिक और मानसिक पक्ष के बारे में भी जानकारी दी गई।
योग को बताया जीवन दर्शन और जीवन पद्धति
योग प्रशिक्षिका जाहावी दीक्षित ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन दर्शन और आत्मानुशासन है। उन्होंने योग को ऐसी जीवन पद्धति बताया, जिसके माध्यम से व्यक्ति संतुलित और स्वस्थ जीवन की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि योग आत्मोपचार एवं आत्मदर्शन की श्रेष्ठ आध्यात्मिक विद्या के रूप में भी देखा जाता है। यह व्यक्ति को स्वयं के भीतर झांकने और अपने व्यक्तित्व को सकारात्मक दिशा में विकसित करने का अवसर देता है।
दीक्षित ने विद्यार्थियों को समझाया कि योग व्यक्ति को सीमित सोच और क्षमताओं से ऊपर उठकर स्वयं को समग्र रूप से विकसित करने की प्रेरणा देता है।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी
योगाभ्यास कराते हुए प्रशिक्षिका ने कहा कि योग को केवल वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। नियमित योगाभ्यास स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में मदद करता है और शरीर के साथ मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी है।
उन्होंने कहा कि योग का उद्देश्य केवल किसी शारीरिक लक्षण को दूर करना नहीं, बल्कि व्यक्ति को भीतर से स्वस्थ और संतुलित बनाने की दिशा में प्रेरित करना है। योग को केवल व्यायाम या किसी विशेष वर्ग की पूजा-पद्धति तक सीमित करना इसके व्यापक स्वरूप को सीमित करना होगा।
उन्होंने विद्यार्थियों से स्वार्थ, आग्रह, अज्ञान और अहंकार से ऊपर उठकर योग को समग्र दृष्टिकोण से समझने और इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आग्रह किया।
त्रिगुण और वैज्ञानिक अवधारणाओं के उदाहरण दिए
योग सत्र के दौरान विद्यार्थियों को सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण की अवधारणाओं के बारे में भी जानकारी दी गई। प्रशिक्षिका ने इन अवधारणाओं को इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन जैसी वैज्ञानिक अवधारणाओं के उदाहरण से जोड़कर विद्यार्थियों को विषय को अलग दृष्टिकोण से समझाने का प्रयास किया।
उन्होंने योग की पारंपरिक और पौराणिक मान्यताओं का उल्लेख करते हुए प्राणायाम के निरंतर अभ्यास से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक परिवर्तन आने की बात कही। साथ ही अष्ट चक्रों के जागरण तथा संचित अशुभ संस्कारों के क्षीण होने से जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं की भी जानकारी दी।
शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उत्साह से लिया भाग
कार्यक्रम में विद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक योग सत्र में भाग लिया। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को योग के प्रति जागरूक करना और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली के लिए नियमित अभ्यास के लिए प्रेरित करना रहा।
इस अवसर पर सत्यपाल अवस्थी, मनोज मीना, राजेश अब्बास खान, रेखा गुप्ता, पिस्ता नेत राम, डी.डी. गुप्ता, शारीरिक शिक्षक चुन्नी लाल मीना, अंकेश मीना, अनिता, नितिन, खुशी, प्रिंस, प्रकाश, रवीना सहित अन्य शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
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