तिजारा विधायक महंत श्री बालकनाथ योगी जी गोरखपुर में CM योगी आदित्यनाथ संग हुए सम्मिलित, महंत दिग्विजयनाथ व अवेद्यनाथ जी की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि
मिशनसच न्यूज, गोरखपुर। तिजारा विधायक और संत समाज की जानी-मानी हस्ती महंत श्री बालकनाथ योगी जी ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ जी के साथ गोरखपुर स्थित श्री गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित विशेष कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यह अवसर था युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं पुण्यतिथि और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 11वीं पुण्यतिथि का।
इस पुण्य अवसर पर देशभर से पूज्यनीय संतों और श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। गोरखनाथ मंदिर परिसर में वातावरण पूरी तरह से आध्यात्मिक और भक्ति रस से सराबोर रहा।
संत विभूतियों का पुण्य स्मरण
कार्यक्रम के दौरान महंत श्री बालकनाथ योगी जी ने दोनों संत विभूतियों के श्री चरणों का पुण्य स्मरण करते हुए भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ जी का जीवन भारतीय संस्कृति, राष्ट्रवाद और सनातन धर्म की रक्षा को समर्पित रहा। उनके मार्गदर्शन और त्याग ने न सिर्फ गोरक्षपीठ को, बल्कि पूरे देश को दिशा देने का काम किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी स्वयं मौजूद रहे। उन्होंने भी अपने गुरुजनों को नमन करते हुए कहा कि महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा है। उन्होंने राष्ट्र, समाज और धर्म की सेवा में अपना संपूर्ण जीवन अर्पित किया।
संत समाज और श्रद्धालुओं की उपस्थिति
गोरखनाथ मंदिर परिसर में इस मौके पर बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु उपस्थित रहे। मंदिर परिसर में भजन, कीर्तन और व्याख्यानों का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने दोनों महंतों की तस्वीरों पर पुष्प अर्पित कर अपने आराध्य गुरुओं को नमन किया।
बालकनाथ जी का वक्तव्य
तिजारा विधायक महंत बालकनाथ योगी जी ने कहा कि संतों का जीवन एक दीपक की तरह होता है जो समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ का जीवन दर्शन हमें सत्य, सेवा और समर्पण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने यह भी कहा कि गोरखनाथ मंदिर सिर्फ धार्मिक केंद्र ही नहीं बल्कि राष्ट्रवाद और सामाजिक चेतना का भी प्रतीक रहा है।
सामाजिक और धार्मिक संदेश
इस पुण्यतिथि आयोजन ने यह संदेश दिया कि संत महापुरुषों की स्मृति और उनकी शिक्षाएं सदैव जीवित रहती हैं। आज के समय में जब समाज कई चुनौतियों से गुजर रहा है, ऐसे में इन संतों का मार्गदर्शन नई पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण और संस्कारों की ओर अग्रसर करने में सहायक होगा।
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