जैन मंदिरों में भक्तामर विधान और जिनेन्द्र भक्ति के साथ आदिनाथ जयंती पर श्रद्धालुओं ने चढ़ाए अर्घ्य
अलवर। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का जन्म-तप कल्याणक महापर्व गुरुवार को शहर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जैन मंदिरों में सुबह-सुबह घंटे-घड़ियाल और जयकारों की गूंज सुनाई दी। श्रद्धालुओं ने जिनेंद्र भक्ति करते हुए भगवान आदिनाथ के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।
भगवान आदिनाथ की जयंती के अवसर पर शहर के जयपुर रोड स्थित अहिंसा स्थल आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर तथा मन्नी का बड़ स्थित श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन मंदिरों में भक्तामर विधान का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में जैन धर्मावलंबियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने नृत्य और भक्ति गीतों के माध्यम से जिनेंद्र भक्ति करते हुए भगवान आदिनाथ की वंदना की और विधान मंडल पर अर्घ्य चढ़ाए। इससे पहले जैन मंदिरों में सुबह भगवान का अभिषेक और शांतिधारा के कार्यक्रम संपन्न हुए।
मन्नी का बड़ स्थित आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में 11 मार्च से प्रारंभ हुए भक्तामर के अखंड पाठ का समापन भी गुरुवार सुबह हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे वातावरण में भक्ति का माहौल देखने को मिला।
जैन पत्रकार महासंघ अलवर के जिला संयोजक हरीश जैन ने बताया कि सुबह से ही श्रद्धालुओं का मंदिरों में आना शुरू हो गया था और भगवान आदिनाथ के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा। श्रद्धालुओं की भक्ति ऐसी थी कि दर्शनों के लिए आने वाले लोग भी मंदिर में बैठकर भक्ति में लीन हो गए।
इसके अलावा शहर के विभिन्न जैन मंदिरों में भी भगवान आदिनाथ की जयंती पर अभिषेक, पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। अहिंसा स्थल दिगम्बर जैन मंदिर में बच्चू सिंह जैन के निर्देशन में विधान का आयोजन किया गया, जबकि मन्नी का बड़ स्थित आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में मंदिर कमेटी के निर्देशन में भक्तामर विधान संपन्न हुआ। इन मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
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