आचार्य पुलकसागर बोले—राष्ट्र से बड़ा कोई नहीं, 15 से 30 अगस्त तक चित्रकूटधाम में सर्व समाज के लिए बहेगी ज्ञान की धारा
भीलवाड़ा। राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज के चातुर्मास के दौरान जिस ज्ञान गंगा महोत्सव के शुभारंभ का इंतजार था, वह पल अब स्वाधीनता दिवस पर साकार होने जा रहा है। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से आयोजित यह महोत्सव 15 अगस्त से 30 अगस्त तक नगर निगम के चित्रकूटधाम में चलेगा। महोत्सव का शुभारंभ शनिवार को स्वाधीनता दिवस के अवसर पर दोपहर 2 बजे राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कार्यक्रम के साथ होगा।
श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि महोत्सव की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शुभारंभ अवसर पर आचार्य पुलकसागरजी महाराज राष्ट्रभक्ति का संदेश देंगे और इसके साथ ही ज्ञान गंगा महोत्सव की शुरुआत होगी। आयोजन में विभिन्न संगठनों की ओर से देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी जाएंगी।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने शनिवार सुबह सूर्यमहल में धर्म संदेश देते हुए कहा कि व्यक्ति, समाज और धर्म से भी बड़ा राष्ट्र है, इसलिए ज्ञान गंगा महोत्सव का प्रारंभ राष्ट्रभक्ति से होगा। उन्होंने कहा कि यह आयोजन किसी एक धर्म या समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि सर्व समाज और जन-जन के लिए है।
उन्होंने कहा कि इस व्याख्यान माला में किसी पंथ या संप्रदाय की दीवार नहीं होगी। जो भी व्यक्ति यहां आएगा, वह राष्ट्र, धर्म और अपने जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा लेकर जाएगा। सद्व्यवहार, अच्छे संस्कार और मानवीय मूल्यों के माध्यम से भारत को महान बनाने का संकल्प लेना आवश्यक है।
आचार्यश्री ने कहा कि ज्ञान गंगा महोत्सव किसी धर्म या समाज विशेष के लिए नहीं, बल्कि जन-जन के लिए आयोजित किया जा रहा है। यहां आने वाला व्यक्ति किसी जाति या संप्रदाय की पहचान से ऊपर उठकर केवल सत्संग प्रेमी के रूप में आएगा।
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि 15 से 30 अगस्त तक चलने वाले इस महोत्सव में भीलवाड़ा के साथ राजस्थान और देश के विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। 15 अगस्त को उद्घाटन कार्यक्रम दोपहर 2 बजे से होगा, जबकि 16 अगस्त से प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10 बजे तक प्रवचन आयोजित किए जाएंगे।
महोत्सव के दौरान 19 अगस्त को मोक्ष सप्तमी तथा 28 अगस्त को रक्षाबंधन के अवसर पर विशेष आयोजन होंगे।
आचार्य पुलकसागरजी ने कहा कि जीवन को सार्थक बनाना है तो मिले हुए समय में अधिकाधिक भगवान का नाम जपना चाहिए और नवकार महामंत्र का स्मरण करना चाहिए। इससे पापों का क्षय होने का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने कहा कि जब तक व्यक्ति धर्म से नहीं जुड़ता और जिनवाणी को जीवन में आत्मसात नहीं करता, तब तक आत्मकल्याण का मार्ग पूर्ण नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि भारत को महान बनाने के लिए केवल विकास ही नहीं, बल्कि संस्कार, सद्व्यवहार और मानवीय मूल्यों को भी जीवन का हिस्सा बनाना होगा।
चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह ने बताया कि प्रवचन के प्रारंभ में दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य श्रीमती चंचलदेवी, पदमचंद, सुनील एवं अनिल गदिया परिवार ने प्राप्त किया।
समिति के सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने बताया कि स्वाधीनता दिवस पर सूर्यमहल में सुबह 8.30 से 10 बजे तक प्रवचन होंगे। इसके अलावा शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा एवं आरती का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर धर्मलाभ ले रहे हैं।
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