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    Homeटहला तहसील में जमीन घोटाले के आरोप: तहसीलदार सहित 15 पर FIR

    टहला तहसील में जमीन घोटाले के आरोप: तहसीलदार सहित 15 पर FIR

    टहला : प्रवीण दहिया, पटवारी नरेंद्र और गिरदावर नारायण लाल पर गंभीर आरोप; शिकायतकर्ता ने बताया“डर और दबाव बनाकर कराए गए सौदे”

    अलवर (टहला): जिले की टहला तहसील एक बार फिर विवादों में आ गई है। यहां के तहसीलदार, पटवारी और गिरदावर पर किसानों की जमीन हड़पने, पद का दुरुपयोग करने और भ्रष्टाचार करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले में पुलिस थाना टहला में एफआईआर संख्या 96/2026 दर्ज होने के बाद मामला और भी तूल पकड़ता नजर आ रहा है। शिकायतकर्ता कैलाश चंद्र भारद्वाज, निवासी गौलाकाबास (तहसील टहला, जिला अलवर) ने  आरोप लगाया है कि तहसीलदार प्रवीण दहिया, पटवारी नरेंद्र और गिरदावर नारायण लाल  सहित अन्य  ने मिलकर एक सुनियोजित तरीके से किसानों को निशाना बनाया।

    डराकर जमीन हड़पने का आरोप

    शिकायत के अनुसार, आरोपित अधिकारी उन किसानों को निशाना बनाते थे जिनकी जमीनें विवादित थीं या जिनके खातेदारी अधिकार अभी लंबित थे। ऐसे किसानों को धारा 14(4) राजस्थान भू-आवंटन नियम 1970 के तहत आवंटन निरस्त करने की धमकी दी जाती थी।बताया गया है कि किसानों को डर और दबाव में लाकर उनकी जमीन नाम मात्र की कीमत पर अपने या अपने बताए हुए लोगों के नाम करवाने के लिए मजबूर किया जाता था।

    खास जमीन का मामला और कथित साजिश

    शिकायत में एक विशेष भूमि (खसरा नंबर 1739, 1745, 1771 और 1772, कुल रकबा 0.74 हेक्टेयर, ग्राम तालाब) का जिक्र किया गया है, जो पहले गैर-खातेदारी में दर्ज थी।आरोप है कि इस जमीन के खातेदारी अधिकार दिलाने के नाम पर अधिकारियों ने पहले आवंटन निरस्त कराने की प्रक्रिया शुरू करवाई और फिर दबाव बनाकर जमीन का सौदा कराया।

    शिकायत के मुताबिक:

    28 नवंबर 2025 को खातेदारी अधिकार दिए गए
    1 दिसंबर 2025 को जमीन का बैनामा नरसी राम गुर्जर के नाम किया गया
    4 दिसंबर 2025 को उसी जमीन को आगे हरियाणा निवासी गौरव पाराशर को बेच दिया गया
    न्यायालय के आदेश पर FIR दर्ज

    शिकायतकर्ता ने बताया कि जब इस पूरे मामले की जानकारी मिली, तो उन्होंने न्यायालय में परिवाद दायर किया। इसके बाद न्यायालय के आदेश पर पुलिस थाना टहला में FIR संख्या 96/2026 दर्ज की गई।

    धमकी और दबाव का भी आरोप

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि जब शिकायतकर्ता ने अधिकारियों से संपर्क किया, तो उन्हें चुप रहने और कार्रवाई न करने की धमकी दी गई। यहां तक कि झूठे मुकदमे में फंसाने और जमीन को सरकारी घोषित करने की चेतावनी भी दी गई।

    पहले भी कई शिकायतें, लेकिन कार्रवाई नहीं

    शिकायतकर्ता का आरोप है कि इससे पहले भी कई किसानों ने इन अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें की थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके चलते क्षेत्र में डर का माहौल बना हुआ है और लोग खुलकर सामने आने से बच रहे हैं।कैलाश चंद्र भारद्वाज ने प्रशासन से मांग की है कि तहसीलदार प्रवीण दहिया, पटवारी नरेंद्र और गिरदावर नारायण लाल को तत्काल निलंबित कर निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि प्रभावित किसानों को न्याय मिल सके।

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