बेरोजगारी और आर्थिक नीतियों को लेकर भाजपा सरकारों पर साधा निशाना, युवाओं को मुद्दों से भटकाने का टीकाराम जूली ने लगाया आरोप
पुष्कर। राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने गुरुवार को पुष्कर में आयोजित कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर को संबोधित करते हुए केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों पर बेरोजगारी को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज देश का युवा जुमलों की राजनीति का शिकार होकर दर-दर भटकने को मजबूर है और सरकार वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए बेरोजगारी को सांप्रदायिकता का हथियार बना रही है।
डिग्री हाथ में, पर रोजगार नदारद
नेता प्रतिपक्ष जूली ने कहा कि देश के करोड़ों शिक्षित युवाओं की आंखों में सपने हैं, लेकिन जेब खाली है। उन्होंने अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की ‘स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026’ रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि हर साल देश में 50 लाख ग्रेजुएट निकलते हैं, लेकिन नौकरी केवल 17 लाख युवाओं को ही मिल पाती है।
उन्होंने बताया कि ‘द पायनियर’ अखबार के अनुसार मार्च 2026 तक युवा बेरोजगारी दर 15.2 प्रतिशत और महिला युवाओं में यह आंकड़ा 18 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि 2014 में “अच्छे दिन” का नारा देने वालों के शासन में युवाओं के सबसे बुरे दिन आ गए हैं। आज हालात यह हैं कि ‘ग्रेजुएट वड़ा पाव’, ‘MBA चायवाला’ और ‘इंजीनियर उबर ड्राइवर’ जैसे उदाहरण युवाओं की डिग्रियों और सपनों का अपमान बन चुके हैं।
नोटबंदी और जीएसटी से रोजगार पर असर
भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों पर निशाना साधते हुए जूली ने कहा कि सालाना दो करोड़ नौकरियों का वादा करने वाली सरकार के कार्यकाल में करोड़ों रोजगार खत्म हो गए। उन्होंने सीएमआईई (CMIE) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश में बेरोजगारी दर 7 से 8 प्रतिशत के बीच बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि 2016 की नोटबंदी ने एमएसएमई और छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ दी, जिससे शुरुआती दौर में ही लाखों नौकरियां खत्म हो गईं। इसके बाद लागू की गई जटिल जीएसटी व्यवस्था के कारण लाखों छोटे प्रतिष्ठान बंद हो गए और करोड़ों लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटे व्यापारियों को कमजोर कर बाजार बड़े कॉरपोरेट घरानों के हवाले कर दिया गया।
सरकारी विभागों में लाखों पद खाली
जूली ने कहा कि केंद्र सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्किल इंडिया’ जैसी योजनाएं पूरी तरह विफल साबित हुई हैं। उन्होंने कहा कि रेलवे, आयकर विभाग और सीएजी सहित कई विभागों में लाखों पद खाली पड़े हैं, लेकिन भर्तियां नहीं की जा रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे भर्ती के लिए करोड़ों युवाओं से आवेदन शुल्क लेने के बावजूद परीक्षाएं समय पर आयोजित नहीं की जा रही हैं। यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में भी पदों की संख्या घटा दी गई है। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार देने के बजाय उन्हें सांप्रदायिकता, जातिवाद और मंदिर-मस्जिद जैसे मुद्दों में उलझाया जा रहा है ताकि वे रोजगार पर सवाल न उठा सकें।
राजस्थान न्यूनतम आय गारंटी कानून का जिक्र
पूर्व सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री जूली ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने युवाओं, बुजुर्गों और वंचित वर्गों के हित में ‘राजस्थान न्यूनतम आय गारंटी कानून 2023’ लागू किया था। उन्होंने कहा कि राजस्थान ऐसा कानून लाने वाला देश का पहला राज्य बना, जिसमें ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 125 दिन के रोजगार की गारंटी और बुजुर्गों, दिव्यांगों व विधवाओं को न्यूनतम पेंशन का कानूनी अधिकार दिया गया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान भाजपा सरकार इस जनहितैषी कानून को प्रभावी रूप से लागू नहीं कर रही है, जिससे पात्र लोग सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
कांग्रेस की नीतियों को बताया रोजगार की नींव
जूली ने कहा कि कांग्रेस सरकारों ने हमेशा रोजगार सृजन को प्राथमिकता दी। उन्होंने भाखड़ा नांगल, हीराकुंड और नागार्जुन सागर जैसे बड़े बांधों का उदाहरण देते हुए कहा कि ये केवल इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं नहीं थीं, बल्कि करोड़ों लोगों के लिए रोजगार के साधन भी बनीं।
उन्होंने कहा कि 1991 में कांग्रेस सरकार द्वारा किए गए आर्थिक उदारीकरण ने भारत को आईटी क्षेत्र में नई पहचान दिलाई। आज बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों में काम कर रहे लाखों युवाओं का भविष्य कांग्रेस की नीतियों की देन है। उन्होंने मनरेगा योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस योजना ने ग्रामीण भारत को रोजगार की गारंटी देकर दुनिया का सबसे बड़ा सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम स्थापित किया।
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