विद्या संबल योजना के तहत नियुक्त अतिथि शिक्षकों को अब तक नहीं मिला भुगतान, प्रति घंटे 400 रुपए और अधिकतम 30 हजार रुपए मासिक मानदेय का है प्रावधान
विपिन मेहंदीरत्ता, नौगांवा। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए लागू विद्या संबल योजना के तहत गेस्ट फैकल्टी के रूप में नियुक्त शिक्षक इन दिनों दोहरी परेशानी से गुजर रहे हैं। एक तरफ स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, दूसरी तरफ खुद अपने मानदेय के लिए इंतजार कर रहे हैं। नियुक्ति हुए करीब डेढ़ माह बीत चुका है, लेकिन अब तक भुगतान नहीं हुआ। दीपावली का त्योहार नजदीक है, ऐसे में शिक्षकों की उम्मीदें अब बकाया मानदेय पर टिकी हैं।
हैरानी की बात यह है कि विभाग ने शिक्षकों से सेवाएं लेना शुरू कर दिया, लेकिन मेहनताने के भुगतान की व्यवस्था अब तक पटरी पर नहीं आई। शिक्षक नियमित रूप से स्कूलों में शिक्षण कार्य कर रहे हैं, मगर उनकी जेब खाली है। त्योहार के मौके पर घर-परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए भी उन्हें अपने ही हक के पैसों का इंतजार करना पड़ रहा है।
प्रति घंटे 400 रुपए, अधिकतम 30 हजार मासिक मानदेय
विद्या संबल योजना के तहत व्याख्याता स्तर के गेस्ट फैकल्टी शिक्षक को प्रति घंटे 400 रुपए मानदेय देने का प्रावधान है। वहीं अधिकतम मासिक मानदेय 30 हजार रुपए निर्धारित है। इसके बावजूद डेढ़ माह से सेवाएं देने वाले शिक्षकों को भुगतान नहीं मिलना विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
काम लेने में तेजी, भुगतान में देरी क्यों?
शिक्षकों का कहना है कि नियुक्ति के बाद से वे पूरी जिम्मेदारी के साथ विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं। जब विभाग उनसे लगातार काम ले रहा है तो मानदेय भुगतान में देरी का कारण भी स्पष्ट होना चाहिए। दीपावली जैसे बड़े त्योहार पर मानदेय नहीं मिलने से आर्थिक परेशानियां बढ़ रही हैं।
गेस्ट फैकल्टी शिक्षक दीपावली से पहले मानदेय भुगतान की मांग उठा रहे हैं। उनका कहना है कि त्योहार पर वेतन या मानदेय मिलना कोई एहसान नहीं, बल्कि उनकी सेवाओं का हक है। ऐसे में शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को दीपावली से पहले भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए।
बड़ा सवाल: जब शिक्षकों की नियुक्ति समय पर हो सकती है और उनसे नियमित शिक्षण कार्य लिया जा सकता है, तो उनके मानदेय भुगतान में डेढ़ माह की देरी क्यों? क्या जिम्मेदार अधिकारी दीपावली से पहले इन शिक्षकों को उनका हक दिला पाएंगे?
असहाय सीडीईओ
उधर सीडीईओ महेश गुप्ता का कहना है कि यह संविदा के कार्मिक है। इनकी आईडी नहीं है। बीकानेर निदेशालय को पत्र लिखकर निर्देश माँग रखे है। निर्देश मिलते ही शीघ्र ही भुगतान की कार्यवाही की जावेगी।
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