विश्व रिकॉर्ड में मिली नई पहचान, स्वामी विवेकानंद पर 18 वर्षों के शोध-लेखन से डॉ. जुल्फिकार के नाम हुए पांच रिकॉर्ड
अलवर। जिले के निकटवर्ती भीमसर गांव के युवा लेखक एवं शोधकर्ता डॉ. जुल्फिकार ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम दर्ज कराई है। स्वामी विवेकानंद के जीवन, दर्शन और विचारों पर लंबे समय से शोध एवं लेखन कर रहे डॉ. जुल्फिकार का नाम अब जीनियस बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हुआ है। इस उपलब्धि के साथ उनके नाम कुल पांच विश्व रिकॉर्ड दर्ज होने का दावा किया गया है।
बताया गया कि संबंधित संस्था की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनकी उपलब्धि को आधिकारिक मान्यता प्रदान की गई। यह सम्मान उनके अनुसंधान, लेखन, शिक्षा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में करीब 18 वर्षों के योगदान के लिए दिया गया है। उनके कार्यों में विशेष रूप से स्वामी विवेकानंद के जीवन, दर्शन और विचारों पर किए गए व्यापक शोध को शामिल किया गया है।
स्वामी विवेकानंद पर शोध बना पहचान
डॉ. जुल्फिकार लंबे समय से स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण मिशन से जुड़े विषयों पर शोध कर रहे हैं। उनके अनुसार, विवेकानंद के विचारों को युवाओं और समाज तक पहुंचाने के उद्देश्य से उन्होंने शोध, लेखन, शैक्षणिक गतिविधियों और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से लगातार काम किया है।
उनके कार्यों का दायरा भारत तक सीमित नहीं रहा। बांग्लादेश, श्रीलंका और सिंगापुर सहित विदेशों में स्थित रामकृष्ण मठ-मिशन संस्थाओं से जुड़े विषयों पर भी उन्होंने शोध किया है। इसी व्यापक कार्य के चलते विभिन्न रिकॉर्ड पुस्तकों में उनका नाम दर्ज होने की बात कही गई है।
पहले भी चार विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किए
डॉ. जुल्फिकार के नाम इससे पहले चार अलग-अलग विश्व रिकॉर्ड पुस्तकों में उपलब्धियां दर्ज होने का दावा किया गया है। इनमें शामिल हैं—
1. लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड
भारत के साथ बांग्लादेश, श्रीलंका और सिंगापुर स्थित रामकृष्ण मठ-मिशन संस्थाओं पर शोध करने वाले पहले भारतीय मुस्लिम युवा के रूप में उनका नाम दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है।
2. यूएसए बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड
जिले के 62 सरकारी एवं गैर-सरकारी विद्यालयों में करीब 10 हजार विद्यार्थियों के बीच ‘स्वामी विवेकानंद स्वाध्यायमाला प्रतियोगिता’ के आयोजन के लिए उन्हें रिकॉर्ड में स्थान मिलने का दावा किया गया है।
3. भारत बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड
वेलूर मठ सहित देश के 50 से अधिक रामकृष्ण मठों का भ्रमण करने तथा स्वामी विवेकानंद पर 32 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों के आयोजन के लिए उनका नाम रिकॉर्ड में दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
4. एशियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड
पिछले सात वर्षों में करीब 80 हजार स्वामी विवेकानंद चित्रांकित कैलेंडर और 20 हजार विवेकानंद पुस्तकों का नि:शुल्क वितरण करने के लिए भी उन्हें रिकॉर्ड में स्थान मिलने की बात कही गई है।
पांच विश्व रिकॉर्ड से बढ़ाया क्षेत्र का गौरव
नई उपलब्धि के बाद डॉ. जुल्फिकार के नाम पांच विश्व रिकॉर्ड दर्ज होने का दावा किया गया है। उनके कार्यों में शोध के साथ-साथ विद्यार्थियों और आमजन तक स्वामी विवेकानंद के विचारों को पहुंचाने के लिए किए गए विभिन्न प्रयास भी शामिल बताए गए हैं।
डॉ. जुल्फिकार की इस उपलब्धि को उनके करीब दो दशक लंबे शोध, लेखन, शिक्षा और सामाजिक सेवा के निरंतर प्रयासों का परिणाम माना जा रहा है। उनके समर्थकों और क्षेत्रवासियों ने इसे अलवर जिले और भीमसर गांव के लिए गौरव की उपलब्धि बताया है।
डॉ. जुल्फिकार को स्वामी विवेकानंद केंद्रित कार्यों के लिए देश-विदेश में सराहना मिलने की बात कही गई है। उनका कहना है कि विवेकानंद के विचार आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं और उनके संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना उनके शोध एवं सामाजिक कार्यों का प्रमुख उद्देश्य है।
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