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    “ताइक्वांडो प्रतियोगिता में क्षमा और पावनी कचेरा ने जीते गोल्ड और ब्रॉन्ज, खैरथल का नाम किया रोशन”

    ताइक्वांडो प्रतियोगिता में पदक हासिल कर किया खैरथल का नाम रोशन

    खैरथल, मनीष मिश्रा | मिशन सच न्यूज़

    राजस्थान के अलवर ज़िले में दिनांक 27 जुलाई 2025 को आयोजित हुई राज्य स्तरीय “सरिस्का कप ताइक्वांडो प्रतियोगिता” में खैरथल की बेटियों ने शानदार प्रदर्शन कर अपने क्षेत्र का नाम गौरव से ऊँचा किया। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता का आयोजन पर्शुराम हॉल, अलवर में किया गया, जिसमें पूरे राज्य से 500 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।

    खैरथल की निवासी क्षमा कचेरा, पुत्री श्री विकास कुमार कचेरा ने 31 किलोग्राम भार वर्ग में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। वहीं उनकी बड़ी बहन पावनी कचेरा ने शानदार मुकाबले खेलते हुए ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया।

    इस प्रतियोगिता में राजस्थान के अलग-अलग जिलों से बच्चों ने हिस्सा लिया था, लेकिन खैरथल की बेटियों ने अपने जज़्बे, आत्मविश्वास और कठिन परिश्रम से सभी को प्रभावित किया।

    कोचिंग सेंटर में हुआ भव्य स्वागत

    प्रतियोगिता के बाद बुधवार को खैरथल स्थित मार्शल आर्ट कोचिंग सेंटर (क्षत्रपती शिवाजी क्लब) में विजयी बेटियों का डॉ. नेहा शर्मा द्वारा सम्मानित किया गया। उन्होंने दोनों बहनों को मेडल पहनाकर आशीर्वाद और प्रोत्साहन दिया। इस अवसर पर उपस्थित योगाचार्य डॉ. हरिओम सैनी ने भी बच्चों की मेहनत की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

    एक प्रेरणा बनीं खैरथल की बेटियाँ

    क्षमा और पावनी का यह प्रदर्शन केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल है। मार्शल आर्ट जैसे आत्मरक्षा और आत्मविकास के खेल में लड़कियों की भागीदारी एक सकारात्मक संकेत है।

    क्षमा की उम्र अभी मात्र 11 वर्ष है, लेकिन उसका आत्मविश्वास और मुकाबले के दौरान का संयम किसी अनुभवी खिलाड़ी से कम नहीं था। वहीं पावनी ने भी अपनी बहन के साथ मिलकर खैरथल को गौरवान्वित किया।

    क्या है ताइक्वांडो और क्यों ज़रूरी है?

    ताइक्वांडो एक कोरियन मार्शल आर्ट है जो आत्मरक्षा, अनुशासन और मानसिक शक्ति को विकसित करता है। आज के समय में जब आत्मरक्षा की आवश्यकता और मानसिक संतुलन की मांग बढ़ रही है, ऐसे में ताइक्वांडो जैसी विधाओं को स्कूलों और समाज में प्रोत्साहन देना समय की माँग है।

    समाज की भूमिका

    इस अवसर पर कोचिंग सेंटर के प्रशिक्षकों और अभिभावकों ने एक सुर में कहा कि बच्चों को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करना चाहिए। ये खेल न केवल शारीरिक रूप से मज़बूत बनाते हैं, बल्कि आत्मबल भी बढ़ाते हैं।

    निष्कर्ष

    क्षमा और पावनी कचेरा की यह उपलब्धि न केवल खैरथल के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह पूरे राजस्थान के लिए भी एक मिसाल है कि किस प्रकार छोटे शहरों और गांवों से निकले प्रतिभाशाली बच्चे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमक सकते हैं।

    MissionSach.com परिवार की ओर से इन दोनों होनहार बेटियों को हार्दिक बधाई एवं उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएँ।

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