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    थानागाजी किले की नीलामी पर न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला, विवाद का पटाक्षेप

    13 साल पुराने मामले में थानागाजी किले की नीलामी निरस्त, इको ट्यूरिज्म की उम्मीद

    मिशनसच न्यूज, थानागाजी। किले के स्वामित्व और नीलामी को लेकर पिछले 13 वर्षों से चले आ रहे कानूनी विवाद में न्यायालय ने ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए नीलामी को निरस्त कर दिया है। माननीय सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट नरेंद्र कुमार मीना ने ग्राम पंचायत बनाम राजस्थान सरकार प्रकरण में सुनवाई करते हुए नीलामी प्रक्रिया को नियमों के विपरीत माना।

    न्यायालय ने आदेश दिया कि नीलामी में जमा कराई गई पूरी राशि नीलामकर्ता को 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस लौटाई जाए। इस प्रकरण में उपवन संरक्षक अलवर आर. के. हुड्डा के निर्देशन में वन विभाग द्वारा प्रभावी रूप से पक्ष रखा गया, जिसे न्यायालय ने स्वीकार किया।

    थानागाजी किला खसरा नंबर 2584 में स्थित है, जिसका कुल क्षेत्रफल 22.44 हेक्टेयर है। यह भूमि दिनांक 16 नवंबर 1999 को राज्य सरकार द्वारा विधिवत रूप से वन विभाग को हस्तांतरित की जा चुकी थी। इसके बावजूद वर्ष 2013 में जिला स्तरीय नजूल संपत्ति निस्तारण समिति द्वारा की गई नीलामी को न्यायालय ने अवैध करार दिया।

    न्यायालय ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के 12 दिसंबर 1996 के आदेश का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि वन भूमि पर किसी भी प्रकार की गैर-वानिकी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस आधार पर नीलामी को पूर्णतः नियम विरुद्ध मानते हुए निरस्त किया गया।

    इस निर्णय पर स्थानीय व्यापारियों में खुशी का माहौल है। कस्बे के व्यापारी रामेश्वर दयाल, प्रहलाद, मोहन, अशोक, सावित्री, रजनी, पुष्पेंद्र एवं बाबूलाल ने बताया कि यदि किले को पर्यटन के लिए विकसित किया जाता है तो थानागाजी में व्यापारिक गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। विदेशी एवं देशी पर्यटकों के आगमन से स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

    किला सरिस्का टाइगर रिजर्व के काकवाड़ी प्रवेश द्वार के समीप स्थित होने के कारण ऐतिहासिक के साथ-साथ पर्यावरणीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। क्षेत्रीय वन अधिकारी जितेन्द्र कुमार सैन ने बताया कि न्यायालय के निर्णय के बाद किले को इको-ट्यूरिज्म साइट के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जाएगा।

    यह निर्णय थानागाजी किले के संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और क्षेत्रीय विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा, जिससे किले की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक पहचान को नया आयाम मिलेगा।

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