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    थार की औषधीय विरासत पर होगा शोध, किसानों को मिलेगा आर्थिक संबल

    कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर को आयुष मंत्रालय से बड़ी सौगात, औषधीय विरासत पर होगा काम 

    मिशनसच न्यूज, जोधपुर। पश्चिमी राजस्थान की थार मरुस्थलीय भूमि औषधीय पौधों की बहुमूल्य विरासत के लिए जानी जाती है। अब इसी विरासत को वैज्ञानिक आधार देने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है। कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर को आयुष मंत्रालय के राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड से थार क्षेत्र के औषधीय पौधों पर अनुसंधान एवं नई प्रजातियों के विकास के लिए 1.20 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत हुई है।

    इस परियोजना के माध्यम से थार की औषधीय संपदा को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी, वहीं किसानों के लिए आय के नए अवसर भी सृजित होंगे।

    किसानों की बढ़ेगी आमदनी
    कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. डॉ. वी.एस. जैतावत ने बताया कि विश्वविद्यालय की पहल पर आयुष मंत्रालय से इस महत्वपूर्ण परियोजना को स्वीकृति मिली है। थार क्षेत्र की औषधीय प्रजातियों पर संगठित अनुसंधान के जरिए विश्वविद्यालय का लक्ष्य लगभग 2000 किसानों तक पहुंच बनाना है। अब तक यह कार्य असंगठित रूप से होता रहा है, लेकिन इस परियोजना से वैज्ञानिक व व्यवस्थित ढंग से कार्य को मजबूती मिलेगी। इससे किसानों को औषधीय पौधों की खेती के माध्यम से अतिरिक्त आय के साधन उपलब्ध होंगे।

    इन औषधीय पौधों पर होगा अनुसंधान
    परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. प्रदीप पगारिया ने बताया कि इस परियोजना के अंतर्गत शंखपुष्पी, अग्निमंथ, अपराजिता, अश्वगंधा एवं गूग्गल जैसे महत्वपूर्ण औषधीय पौधों पर अनुसंधान किया जाएगा। इनकी उन्नत कृषि तकनीक विकसित की जाएगी ताकि किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन कर सकें।

    यह परियोजना जोधपुर मुख्यालय के साथ-साथ बाड़मेर, फलौदी और नागौर जिलों के कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से संचालित की जाएगी। परियोजना क्षेत्रों में औषधीय पौधों के ग्रामीण संग्रहण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। साथ ही गुणवत्ता युक्त पादप सामग्री के लिए सीड जर्म प्लाज्म केंद्र और नर्सरी विकसित की जाएगी।

    इसके अतिरिक्त औषधीय पौधों के मूल्य संवर्धन एवं प्रसंस्करण पर भी कार्य किया जाएगा, जिससे किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल सके।

    परियोजना से होंगे कई लाभ
    इस परियोजना के माध्यम से बदलते वैश्विक वातावरण में जैव विविधता के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। प्रशिक्षण, प्रदर्शन, क्रेता-विक्रेता सम्मेलन, अध्ययन भ्रमण और जर्म प्लाज्म केंद्रों के जरिए किसानों को तकनीकी ज्ञान प्रदान किया जाएगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि संभव होगी।

    परियोजना के प्रमुख उद्देश्य

    • औषधीय पौधों की नई प्रजातियों के विकास के लिए जर्म प्लाज्म केंद्र की स्थापना।

    • स्थानीय एवं विलुप्तप्राय औषधीय पौधों का संरक्षण।

    • औषधीय पौधों की जैविक एवं प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ाना।

    • उत्पादक किसानों और औषधि उद्योगों के बीच मजबूत संपर्क स्थापित करना।

    • स्वास्थ्य संवर्धन के साथ थार की संस्कृति एवं पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना।

    यह परियोजना न केवल थार की औषधीय पहचान को मजबूत करेगी, बल्कि पश्चिमी राजस्थान के किसानों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का नया मार्ग भी प्रशस्त करेगी।

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