रेला गांव के श्रद्धालु मनोज चौधरी की आस्था बनी मिसाल, दंडौती भक्ति से जीता सबका दिल
कठूमर। नगरपालिका क्षेत्र के रेला गांव निवासी दिव्यांग श्रद्धालु मनोज चौधरी ने अपनी अटूट आस्था और दृढ़ संकल्प से ऐसी मिसाल पेश की है, जो हर किसी को प्रेरित करती है। शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने रिंगस से खाटू श्याम मंदिर तक लगभग 17 किलोमीटर की कठिन दंडौती यात्रा पूरी कर यह साबित कर दिया कि सच्ची श्रद्धा के आगे कोई बाधा बड़ी नहीं होती।
मनोज चौधरी अब तक 50 से अधिक बार खाटू श्याम धाम की पैदल और दंडौती यात्रा कर चुके हैं। उनका कहना है कि हर बार बाबा श्याम की कृपा उन्हें नई ऊर्जा और आत्मबल प्रदान करती है। उनके शब्दों में, “शरीर थक सकता है, लेकिन बाबा के प्रति विश्वास कभी नहीं थकता। हारे का सहारा केवल बाबा श्याम हैं।”
दंडौती यात्रा भक्ति की कठिन साधना
दंडौती यात्रा को भक्ति और तपस्या का सर्वोच्च स्वरूप माना जाता है। इस यात्रा में श्रद्धालु साष्टांग दंडवत होकर आगे बढ़ता है। जहां तक हाथ पहुंचते हैं, वहां निशान लगाकर दोबारा उसी स्थान से लेटते हुए यात्रा जारी रखी जाती है। इस प्रकार पूरी दूरी तय करना अत्यंत कठिन माना जाता है, लेकिन मनोज चौधरी ने इसे कई बार सफलतापूर्वक पूरा कर अपनी अदम्य श्रद्धा का परिचय दिया है।
राहगीरों के लिए प्रेरणा बनती है आस्था
रिंगस से खाटू श्याम धाम के मार्ग पर जब लोग मनोज चौधरी को दंडौती करते हुए देखते हैं तो श्रद्धा से अभिभूत होकर “हारे के सहारे बाबा श्याम की जय” के जयकारे लगाते हैं। उनकी भक्ति और समर्पण न केवल अन्य श्रद्धालुओं बल्कि युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
रेला गांव के लाल ने दिया सकारात्मक संदेश
स्थानीय लोगों का कहना है कि मनोज चौधरी ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि मन में विश्वास, संकल्प और भक्ति हो तो शारीरिक सीमाएं भी व्यक्ति की राह नहीं रोक सकतीं। उनकी जीवन यात्रा यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियों में भी आस्था और हौसले के बल पर असंभव लगने वाले लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
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