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    दोनों हाथ नहीं, हौसले हैं मजबूत – मुंडनकला की पायल यादव ने 10वीं में किए 100% अंक हासिल

    कुलदीप मावर, मुंडावर।
    “अगर हौसले बुलंद हों तो कोई भी मुश्किल रास्ता मंज़िल की ओर मोड़ा जा सकता है।” — यह कहावत खैरथल-तिजारा जिले की होनहार बेटी पायल यादव पर पूरी तरह सटीक बैठती है। मुंडावर विधानसभा क्षेत्र के मुंडनकला गांव की रहने वाली पायल ने 10वीं की परीक्षा में 100 प्रतिशत अंक प्राप्त कर पूरे जिले का नाम रोशन किया है।

    पायल की यह सफलता इसलिए भी खास है, क्योंकि उसके दोनों हाथ नहीं हैं, और फिर भी उसने ये मुकाम अपने पैरों से लिखकर हासिल किया है।

    पायल की जिंदगी का संघर्ष उस समय शुरू हुआ, जब वह महज पांच साल की थी। खेलते-खेलते करंट की चपेट में आई और डॉक्टरों को उसकी जान बचाने के लिए उसके दोनों हाथ काटने पड़े। यह हादसा परिवार के लिए बेहद दुखद था, लेकिन पायल ने हार नहीं मानी।

    हॉस्पिटल से घर लौटते ही पायल ने सबसे पहले अपनी कॉपी और पेन मांगे और अपने पैरों से लिखने का अभ्यास शुरू किया। शुरुआत में मुश्किलें थीं, लेकिन पायल के जज़्बे ने असंभव को संभव कर दिखाया। धीरे-धीरे उसकी लेखनी इतनी सुंदर हो गई कि आज वह अपने पैरों से ऐसा साफ-सुथरा लिखती है, जिसे देखकर लोग हैरान रह जाते हैं।

    पढ़ाई के साथ-साथ पायल अपनी दैनिक गतिविधियां — खाना, कपड़े पहनना, पढ़ना और लिखना — सब कुछ अपने पैरों से ही करती है।

    अब पायल का अगला लक्ष्य है — IAS अधिकारी बनना। वह कहती है, “मैं देश की सेवा करना चाहती हूं और उन लोगों के लिए मिसाल बनना चाहती हूं जो परिस्थितियों से हार मान लेते हैं।”

    पायल की सफलता पर मुंडावर क्षेत्र ही नहीं, पूरा जिला गौरवान्वित है। स्कूल प्रबंधन, स्थानीय जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और आम लोग पायल के जज़्बे को सलाम कर रहे हैं।

    💐 पायल यादव की सफलता बताती है कि जब इरादे मजबूत हों, तो कोई भी कमी आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।

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