वैदिक आध्यात्मिक ज्ञान का प्रकाश जन-जन तक पहुंचाने के लिए वैदिक विषयों पर लिख रहे हैं राम शास्त्री
प्रहलाद पुष्पद वरिष्ठ पत्रकार, अलवर। राम शास्त्री अपने आप में अलग, अलबेले और नफ़ीस इंसान हैं। देश-प्रदेश की राजधानियां उनकी कर्मस्थली रहीं। पर इस कर्मयोगी को जानना समझना बाज़ लोगों के लिए किसी उलटबांसी का भावार्थ समझने जैसा दुष्कर कार्य है। कारण, कुछ लोगों ने उन्हें बिजली विभाग में इंजीनियर के रूप में देखा। उन्हें अलवर के ज्योतिषविद गौरीशंकर शास्त्री के उत्तराधिकारी के नज़रिए से भी देखा गया।
कभी वे श्रमिक-कर्मचारी हितों से जुड़े मुद्दों पर नियोक्ताओं/ शासकों से भिड़ते देखे गए। वर्षों तक वे कनॉट प्लेस दिल्ली स्थित कॉफी हाउस में धनी लोगों और यूनिवर्सिटी के युवाओं से गपशप करते हुए या विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के लिए लेखन करते रहे। 10 जनपथ, प्रेस इन्फोर्मेशन ब्यूरो, प्रधानमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों, प्रमुख शासन सचिवों, नौकरशाहों से संवाद उनके ऊँचे रसूखात के प्रमाण हैं।
खुद्दारी ने उन्हें विभिन्न प्रलोभनों से दूर ही रखा। खासा नाम और यश पाकर भी एक दिन उन्होंने पत्रकारिता से किनारा कर लिया और वैदिक अध्यात्म को लेखन की विषयवस्तु बना लिया। अब तक उन्होंने भारतीय ज्ञान प्रणाली के तहत 1248 डिजिटल बुक्स देश के प्रमुख संस्कृत विश्वविद्यालयों को निःशुल्क उपलब्ध कराई हैं।
आर्य नगर अलवर स्थित अपने आवास पर स्थापित ‘नीलकंठ ज्ञानगंज शोध संदर्भ’ पुस्तकालय ही उनकी धरोहर है। राष्ट्रीय आध्यात्मिक पुनर्जागरण अभियान के अध्यक्ष रामशास्त्री ने एक साक्षात्कार के दौरान ‘मिशन सच’ अखबार के इस प्रतिनिधि के साथ बेतकल्लुफ़ संवाद किया –
प्रश्न- अखबार नवीसी छोड़कर वैदिक विषयों पर लेखन क्यों करने लगे?
उत्तर- वैदिक संस्कृति को समझने के लिए वेदों का ज्ञान जरूरी है। भारतीय समाज में वेद अध्ययन की परंपरा का समुचित विकास नहीं हो पाया है। वैदिक आध्यात्मिक ज्ञान का यह प्रकाश जन-जन तक पहुंचाने के लिए मैं वैदिक विषयों पर लिख रहा हूँ
प्रश्न- अपने शोध संकलनों और वैदिक ग्रंथों के बारे में बताएं?
उत्तर- अब तक कैलाश महा रहस्यम, वेद औषधि कल्पतरु, वरुण विद्या रहस्यम, पृथ्वी विद्या, आकाश विद्या, सूर्य विद्या, आर्थिक सुधार की अर्थसत्ता, वायु विद्या और कल्पवृक्ष विद्या आदि पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
प्रश्न- पाठकों के लिए ये ग्रंथ कहां उपलब्ध हैं?
उत्तर- ये पुस्तकें प्रधानमंत्री कार्यालय,भारतीय सेना, नौसेना, संसद, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नेहरू संग्रहालय, एशियाटिक सोसाइटी,थियोसॉफिकल सोसायटी एड्यार के पुस्तकालयों में उपलब्ध हैं। इनके अलावा सभी 22 संस्कृत विश्व विद्यालयों, सभी धर्मों के प्रधान धर्माचार्यों, वैदिक शोध संस्थान, अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया स्टडीज एवं 50 विदेशी दूतावासों के पुस्तकालयों को निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि अधिकाधिक लोग इन वैदिक ग्रंथों का अध्ययन कर सकें। अभिलेखागार (आर्काइव) पर भी उपलब्ध इस आध्यात्मिक साहित्य का लोग लाभ उठा रहे हैं।
प्रश्न- विभिन्न जन-आंदोलनों से जुड़कर आपको क्या मिला?
उत्तर- बेशक मुझे आरएसईबी में इंजीनियर की नौकरी से हाथ धोने पड़े, लेकिन इन आंदोलनों से मुझे मजबूत पहचान और आत्मिक सुख मिला। सजग पत्रकारिता और जन-आंदोलनों में सक्रियता ने मुझे हमेशा चर्चा के केंद्र में रखा।
प्रश्न- हिंदी पत्र-पत्रिकाओं के लिए आप अपना क्या योगदान मानते हैं?
उत्तर- मैंने सम-सामयिक विषयों, ताजा घटनाक्रमों, ज्वलंत मुद्दों पर अखबारों में विचारोत्तेजक लेख, खोजपूर्ण रिपोर्ट, संपादकीय, आवरण कथाएं और नियमित कॉलम लिखे हैं। इनसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनी। चुनावों के मौकों पर राजनीतिक विश्लेषणों, हार-जीत संबंधी पूर्वानुमानों, सटीक टिप्पणियों और विश्वसनीयता ने मुझे कई शीर्ष राजनेताओं, राजनेत्रियों के करीब ला दिया।
प्रश्न- बुलंदियों पर पहुँचे और खूब शोहरत पाई। फिर पत्रकारिता क्यों छोड़ दी?
उत्तर- नौकरशाहों, वरिष्ठ राजनेताओं और राजनीतिक घरानों के निकट रहकर देखा कि वहां अपने अस्तित्व की लड़ाई, स्वार्थपरता, ईर्ष्या-द्वेष, महत्वाकांक्षाएं, षड्यंत्र और भ्रष्टाचार ज्यादा है। पत्रकार भी वहाँ बौने, दीनहीन और अनुकंपा के पात्र बनकर रह जाते हैं।इसलिए पत्रकारिता से मन भर गया और वैदिक साहित्य की ओर रुख कर लिया।
प्रश्न- घोर भौतिकवादी इस युग में वैदिक मार्ग पर कौन चलना चाहेगा?
उत्तर- सुख संसाधनों से उत्पन्न ऊब और संत्रास से बचने के लिए लोग वैदिक अध्यात्म की शरण ले रहे हैं।डिजिटल माध्यम से लोग वैदिक जीवन-शैली को अपना रहे हैं। पद, पैसा, प्रतिष्ठा, भौतिक सुखों से ऊबे अति विशिष्ट लोग भी वेद और दर्शन की राह चल पड़े हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री पी वी नरसिंह राव, उनके सचिव रहे पीवी आरके प्रसाद, पूर्व पीएम राजीव गांधी के सलाहकार रहे डॉ. डीपी त्रिपाठी, पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त नवीन चावला, प्रेस इनफॉर्मेशन ब्यूरो के प्रधान सूचना अधिकारी सु. नरेंद्र आदि ने भी वैदिक मार्ग और दार्शनिक जीवन अपना लिया है।
प्रश्न- वैदिक साहित्य क्या है?
उत्तर- वैदिक साहित्य अत्यंत विशाल और विश्व का सबसे प्राचीन ज्ञान-स्रोत है। वैदिक साहित्य चार वेदों, प्रत्येक वेद अपने मंत्र भाग के साथ-साथ ब्राह्मण ग्रंथों, आरण्यकों और उपनिषदों में बँटा हुआ है। वैदिक साहित्य कर्मकांड, ज्ञान और उपासना का मार्ग बताता है।
प्रश्न- कहते हैं कि वेद ईश्वर की वाणी हैं? हजारों साल से इन्हें सुरक्षित-संरक्षित कैसे रखा जा सका?
उत्तर- हाँ, वेद ईश्वर की वाणी और श्रुति हैं, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी वाचिक (मौखिक) परंपरा से सुरक्षित चले आ रहे हैं। कहना चाहिए कि यह विद्या हमारे कंठ में सुरक्षित रही है। ज्ञान मुख्य रूप से गुरु-शिष्य परंपरा के तहत मौखिक उच्चारण और स्मरण पर आधारित था, जिससे ग्रंथों का शुद्ध पाठ पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित रहा। प्रमुख ग्रंथ आज मुद्रित पुस्तकों और डिजिटल पोर्टल्स के माध्यम से सुरक्षित किए गए हैं, ताकि शोधार्थी उनका अध्ययन कर सकें।
प्रश्न- आप प्राचीन ग्रंथों के लुप्त होने, नष्ट होने या इनके अनुपलब्ध होने की वजह क्या मानते हैं?
उत्तर- मालूम रहे कि वेदों को पहले लिखा नहीं जाता था; इन्हें गुरुओं द्वारा मुख से बोलकर शिष्यों को याद कराया जाता था। इसलिए लिखित सामग्री का अभाव सबसे बड़ा संकट रहा। ताड़पत्रों या भोजपत्रों पर लिखे गए ग्रंथ दीमक, नमी, आग या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण नष्ट हो गए। कालान्तर में गुरु-शिष्य परंपरा चरमराने लगी। आक्रमणों और उथल-पुथल के कारण जब गुरुओं और विद्वानों की यह श्रृंखला टूटी, तो कई वैदिक शाखाएं और ग्रंथ सदा के लिए लुप्त हो गए। ज्ञान की मौखिक (श्रुति) परंपरा निभाने वाली पीढ़ियों का क्रम टूटने से वैदिक वांग्मय को बड़ा झटका लगा। विदेशी आक्रमणों के दौरान कई प्राचीन गुरुकुलों, पुस्तकालयों और धार्मिक केंद्रों को जला दिया गया, इससे अमूल्य हस्तलिखित ग्रंथ हमेशा के लिए खत्म हो गए।
प्रश्न- सनातन वैदिक धर्म अपनाने की आवश्यकता क्या है?
उत्तर- यह जीवन जीने की एक शाश्वत पद्धति है जो कर्तव्य, संयम और प्रकृति के साथ संतुलन का संदेश देती है। वैदिक अध्यात्म भौतिक संतापों (आर्थिक संकटों) को दूर करने का मार्ग बताता है। यह राष्ट्र की सांस्कृतिक एकता, नैतिक मूल्यों के संरक्षण, मानसिक शांति और भाईचारा कायम रखने के लिए जरूरी है।
प्रश्न- क्या सनातन धर्म में भौतिक समस्याओं के समाधान की सामर्थ्य है?
उत्तर- यूँ कहिए कि वह भौतिक समस्याओं के समाधान का मार्ग दिखाता है। सुचारू जीवन के लिए भौतिक और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान करता है।
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