पापड़दा में 180 दंत रोगियों का मौके पर इलाज – विनायक डेंटल की चल चिकित्सा इकाई की प्रशंसनीय पहल
मिशनसच न्यूज , दौसा।
स्वस्थ दांत सिर्फ मुस्कान की खूबसूरती ही नहीं बढ़ाते, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य की कुंजी होते हैं। इसी सोच के साथ विनायक डेंटल हॉस्पिटल एंड ऑर्थोडॉन्टिक सेंटर की चल चिकित्सा इकाई ने पापड़दा गांव में एक दिवसीय नि:शुल्क दंत चिकित्सा शिविर का आयोजन कर 180 से अधिक दंत रोगियों का मौके पर ही इलाज किया। यह पहल ना सिर्फ चिकित्सा सेवा की दिशा में एक मील का पत्थर है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य सुधार के क्षेत्र में एक प्रभावशाली कदम भी है।
शिविर का उद्घाटन और उद्देश्य
शिविर का शुभारंभ पापड़दा के भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केंद्र में हुआ, जहां समाजसेवी अमित मीणा ने फीता काटकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। मुख्य अतिथि के रूप में उन्होंने कहा कि, “विनायक डेंटल की चल चिकित्सा इकाई ग्रामीण अंचलों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है। इन सेवाओं से सैकड़ों लोगों को लाभ मिला है, जो समय, संसाधन और सुविधा के अभाव में इलाज से वंचित रह जाते थे।”
दांतों की सुरक्षा, स्वास्थ्य की पहली शर्त
विनायक डेंटल हॉस्पिटल के निदेशक एवं वरिष्ठ दंत चिकित्सक डॉ. घनश्याम खंडेलवाल ने बताया कि चल चिकित्सा इकाई के माध्यम से ग्रामीणों को मौके पर ही विशेषज्ञ परामर्श और उपचार देने का उद्देश्य है। उन्होंने कहा, “एक स्वस्थ मुस्कान न केवल आत्मविश्वास बढ़ाती है, बल्कि सामाजिक व्यवहार को भी सकारात्मक बनाती है। स्वस्थ दांतों से ही संपूर्ण स्वास्थ्य का मार्ग प्रशस्त होता है।”
विशेषज्ञों की टीम ने किया प्रभावी इलाज
डॉ. अंशुल गर्ग और उनकी विशेषज्ञ टीम ने शिविर में पहुंचे 180 से अधिक मरीजों का दंत परीक्षण और इलाज किया। मरीजों में से कई को लंबे समय से दांतों में दर्द, मवाद, खून आना, दांतों की सड़न और गंदगी जैसी समस्याएं थी। मौके पर ही उनकी क्लीनिंग, फिलिंग और सलाह देकर राहत दी गई।
विनायक डेंटल के जनसंपर्क अधिकारी जितेंद्र शर्मा ने बताया कि शिविर में विशेष सावधानी और आधुनिक तकनीकों के साथ इलाज किया गया, जिससे ग्रामीणों में जबरदस्त संतोष देखा गया।
समाजसेवा और चिकित्सा का अनूठा संगम
शिविर के दौरान दीपक पाराशर (मैनेजर), राहुल गुर्जर, राहुल वर्मा और धर्मेंद्र मीणा की मौजूदगी ने आयोजन को और व्यवस्थित बनाया। पूरा कार्यक्रम अनुशासन और सेवा भावना के साथ संपन्न हुआ, जो विनायक डेंटल की कार्यशैली की पहचान है।
ग्रामीणों में जागरूकता और राहत
शिविर में आए मरीजों ने बताया कि वे लंबे समय से दंत पीड़ा से जूझ रहे थे, लेकिन पास में कोई विशेषज्ञ सेवा नहीं थी। अब उन्हें अपने ही गांव में इलाज मिलने से खुशी और राहत दोनों मिली। लोगों ने इस तरह की नियमित चिकित्सा सेवाओं की मांग भी की।
निष्कर्ष
विनायक डेंटल हॉस्पिटल की चल चिकित्सा इकाई ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि चिकित्सा और सेवा भावना का मेल हो, तो हर गांव में स्वास्थ्य क्रांति लाई जा सकती है। पापड़दा जैसे गांव में 180 मरीजों का मौके पर इलाज करना एक प्रेरणादायक उदाहरण है, जिसे अन्य चिकित्सा संस्थानों को भी अपनाना चाहिए।

