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    बंगाल जीत से बढ़ा भूपेंद्र यादव का सियासी कद, असम हार के बाद जितेंद्र सिंह पर उठे सवाल

    पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत का श्रेय प्रभारी भूपेंद्र यादव को, 

    अलवर। पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद अलवर सांसद एवं केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव का राजनीतिक कद लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। भाजपा ने उन्हें पश्चिम बंगाल का चुनाव प्रभारी बनाया था और उनके नेतृत्व में पार्टी ने राज्य में बड़ी सफलता हासिल की। दूसरी ओर असम चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद वहां के चुनाव प्रभारी और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं।

    राजनीतिक गलियारों में अब अलवर के दोनों बड़े नेताओं की तुलना चर्चा का विषय बन गई है। भाजपा और कांग्रेस ने दो बड़े राज्यों की जिम्मेदारी अलवर के नेताओं को सौंपी थी। पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत और असम में कांग्रेस की हार के बाद दोनों नेताओं के राजनीतिक प्रभाव को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

    केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव पहले भी कई राज्यों में पार्टी के चुनाव प्रभारी और सह प्रभारी रह चुके हैं। बिहार, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारी निभाते हुए भाजपा को सफलता दिलाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती रही है। अब बंगाल में मिली जीत के बाद पार्टी के भीतर उनका प्रभाव और मजबूत माना जा रहा है।

    बंगाल चुनाव के दौरान अलवर दौरे पर आए भूपेंद्र यादव ने कहा था कि उन्हें पार्टी ने विभिन्न राज्यों में काम करने का अवसर दिया और “गंगोत्री से गंगा सागर तक” संगठन के लिए कार्य करने का अनुभव मिला। उन्होंने बिहार, उत्तराखंड, यूपी और झारखंड के चुनावी अनुभवों का भी उल्लेख किया था।

    वहीं कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह राहुल गांधी के करीबी नेताओं में माने जाते हैं। वे अलवर से दो बार सांसद रह चुके हैं और केंद्र सरकार में मंत्री पद भी संभाल चुके हैं। हालांकि असम में कांग्रेस को अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद अब उनकी चुनावी रणनीति पर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में भाजपा की सफलता ने भूपेंद्र यादव को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया है, जबकि असम में कांग्रेस की हार ने पार्टी नेतृत्व के सामने नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

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