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    बंगाल-तमिलनाडु में BJP की अग्निपरीक्षा, नए प्लान से जड़ें मजबूत करने की तैयारी

    पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में प्रचार का शोर थमा

    नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए प्रचार का शोर थम चुका है। ये दोनों राज्य भाजपा के लिए अब तक ‘अजेय दुर्ग’ बने रहे हैं, लेकिन पार्टी इस बार अपने ‘कोरोमंडल ब्लूप्रिंट’ के जरिए इतिहास बदलने की पुरजोर कोशिश कर रही है।

    क्या है भाजपा का ‘कोरोमंडल ब्लूप्रिंट’?

    केंद्र की सत्ता पर मजबूत पकड़ बनाने के बाद, भाजपा ने भारत के पूर्वी तट (ओडिशा, बंगाल, आंध्र प्रदेश) और दक्षिण भारतीय राज्यों (तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल) में विस्तार के लिए एक विशेष योजना तैयार की, जिसे ‘कोरोमंडल ब्लूप्रिंट’ कहा जाता है।

    • सफलता और चुनौतियां: भाजपा ओडिशा और तेलंगाना जैसे राज्यों में अपनी स्थिति मजबूत करने में सफल रही है, लेकिन तमिलनाडु और केरल में उसे अभी भी एक ‘बाहरी पार्टी’ के रूप में देखा जाता है।
    • तमिलनाडु का समीकरण: लोकसभा चुनाव के परिणामों के बाद, भाजपा ने तमिलनाडु में फिर से AIADMK के साथ हाथ मिलाया है ताकि वह राज्य में अपनी पैठ बना सके।
    • पश्चिम बंगाल—अंतिम मोर्चा: ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी सहित पूरी केंद्रीय कैबिनेट ने राज्य में डेरा डाल रखा है।

    AAP के 7 सांसदों का भाजपा में विलय: ‘मनोबल बढ़ाने वाला दांव’

    पश्चिम बंगाल चुनाव के बीच राघव चड्ढा समेत आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों का भाजपा में शामिल होना एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।

    • रणनीतिक समय: सूत्रों का कहना है कि सांसदों के आने की घोषणा 24 अप्रैल को जानबूझकर की गई, ताकि बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया जा सके।
    • भविष्य की भूमिका: राघव चड्ढा और संदीप पाठक जैसे रणनीतिकारों के आने से भाजपा को पंजाब और गुजरात में अपनी जमीन मजबूत करने की उम्मीद है, जहाँ पार्टी वर्तमान में कमजोर स्थिति में है।

    पंजाब में नई शुरुआत की उम्मीद

    पंजाब में भाजपा लंबे समय तक शिरोमणि अकाली दल (SAD) की जूनियर पार्टनर रही, लेकिन किसान बिल विवाद के बाद दोनों दल अलग हो गए।

    • पिछला प्रदर्शन: पिछले विधानसभा चुनाव में 117 सीटों में से भाजपा को केवल 2 सीटें मिली थीं और लोकसभा में खाता भी नहीं खुला था।
    • रणनीति: अब AAP के पूर्व रणनीतिकारों की मदद से भाजपा पंजाब में एक स्वतंत्र और मजबूत विकल्प के रूप में उभरने की तैयारी कर रही है।

    शाह का बड़ा दावा

    गृहमंत्री अमित शाह, जो पिछले दो हफ्तों से बंगाल में ही कमान संभाले हुए हैं, ने दावा किया है कि पहले चरण के चुनाव में भाजपा 110 से अधिक सीटें जीत रही है। यह आक्रामक अभियान दर्शाता है कि भाजपा इस बार बंगाल को अपने पाले में करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।

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