चित्तौड़गढ़ के रामद्वारा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर उमड़ा उल्लास, संत भगतराम महाराज के निर्वाण दिवस पर अन्न क्षेत्र का शुभारंभ
चित्तौड़गढ़। रामद्वारा में चातुर्मासिक सत्संग के तहत आयोजित श्रीमद्भागवत कथा, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव और संत भगतराम महाराज की समाधि पूजन का कार्यक्रम श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान के जन्म की खुशियां मनाईं और एक-दूसरे को बधाइयां देकर मुंह मीठा कराया।
मीरा और प्रहलाद जैसी होनी चाहिए भक्ति
संत दिग्विजयराम महाराज ने कहा कि भगवान सदैव अपने भक्तों की रक्षा के लिए तैयार रहते हैं, लेकिन भक्त की भक्ति भी मीरा बाई और प्रहलाद जैसी अटूट होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भक्त की पुकार पर भगवान किसी भी रूप में उसकी रक्षा के लिए सामने आ सकते हैं। राजा बलि के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि समय आने पर सृष्टि के पालनहार भगवान भक्त के लिए चौकीदार की भूमिका भी निभा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान को केवल दिमाग में नहीं, बल्कि हृदय में विराजित करना चाहिए। संसार को सरोवर और काल को मगरमच्छ बताते हुए उन्होंने माया और शरीर का अहंकार नहीं करने का संदेश दिया।
कृष्ण जन्म से कंस वध तक सुनाया प्रसंग
श्रीमद्भागवत कथा के दौरान संत दिग्विजयराम महाराज ने समुद्र मंथन, गजेन्द्र मोक्ष और श्रीकृष्ण जन्म सहित विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि 5253 वर्ष पूर्व देवकी और वसुदेव के यहां भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। कथा में कृष्ण जन्म से लेकर कंस वध तक के प्रसंगों को विस्तार से सुनाया गया।
उन्होंने कहा कि समुद्र मंथन से निकले विष का भगवान शिव ने पान किया, जिसके कारण वे नीलकंठ कहलाए। उन्होंने रामायण और भागवत के संदेश को समझाते हुए कहा कि रामायण जीवन जीने और भागवत जीवन के अंतिम सत्य को समझने की प्रेरणा देती है।
संत भगतराम महाराज के निर्वाण दिवस पर अन्न क्षेत्र शुरू
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन ही रामद्वारा के संत भगतराम महाराज का देवलोक गमन हुआ था। उनके निर्वाण दिवस पर समाधि पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर सांसद सीपी जोशी, संत दिग्विजयराम महाराज सहित अन्य संतों और श्रद्धालुओं ने संत भगतराम धार्मिक सेवा संस्थान के अन्न क्षेत्र का शुभारंभ किया।
संत दिग्विजयराम महाराज ने संत भगतराम महाराज को याद करते हुए कहा कि वे लोग सौभाग्यशाली हैं, जिन्होंने उनके दर्शन किए। संत भगतराम महाराज ने सरल, सात्विक जीवन जीने के साथ लोक कल्याण की भावना को सदैव प्राथमिकता दी।
अहंकार से मुक्त और भक्तिमय हो जीवन: आचार्य रामदयाल महाराज
कार्यक्रम के दौरान आचार्य रामदयाल महाराज के प्रवचन का सीधा प्रसारण भी किया गया। उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन अहंकार से मुक्त और भक्तिमय होना चाहिए। चित्तौड़गढ़ की धरती को पावन बताते हुए उन्होंने संत भगतराम महाराज के जीवन और उनके लोक कल्याणकारी कार्यों को स्मरण किया।
उन्होंने कहा कि अन्न क्षेत्र महापुरुषों की तपस्या का प्रसाद और विराट यज्ञ के समान है। जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से कर्तव्यपरायणता और अन्याय के खिलाफ संघर्ष की प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
आचार्य रामदयाल महाराज ने कहा कि श्रीराम मर्यादा और श्रीकृष्ण कर्तव्यपरायणता का संदेश देते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष किया तथा अर्जुन को गीता का उपदेश दिया। उन्होंने कहा कि गीता केवल बुजुर्गों के लिए नहीं है, बल्कि युवाओं, महिलाओं और समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए जीवन का मार्गदर्शन करने वाला ग्रंथ है।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के दौरान रामद्वारा परिसर भक्ति और उल्लास से सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म पर जयकारे लगाए और जन्मोत्सव की खुशियां एक-दूसरे के साथ साझा कीं।
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