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    भामाशाह शिक्षक बने मिसाल, सपेरा बस्ती के विद्यालय को मिला नया संबल

    सपेरा बस्ती के विद्यालय में शिक्षकों का योगदान, टीन शेड और कक्ष निर्माण से बच्चों को मिली बड़ी राहत

    किशनगढ़बास। अरावली पर्वतमाला की गोद में स्थित सपेरा बस्ती के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत दो शिक्षकों ने अपने व्यक्तिगत सहयोग से विद्यालय के विकास की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी क्षेत्रभर में सराहना हो रही है। एक शिक्षक ने मंच पर टीन शेड बनवाया, जबकि दूसरे शिक्षक पहले ही विद्यार्थियों के लिए नया कक्ष बनवाकर विद्यालय को समर्पित कर चुके हैं।

    शिक्षक हरकेश यादव
    शिक्षक हरकेश यादव

    विद्यालय में कार्यरत शिक्षक हरकेश यादव ने अपनी ओर से लगभग एक लाख रुपये की राशि खर्च कर विद्यालय के मंच पर टीन शेड का निर्माण कराया है। इसके बाद अब विद्यार्थियों को धूप और बारिश के दौरान सांस्कृतिक एवं शैक्षिक कार्यक्रम आयोजित करने में परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

    इससे पूर्व शैक्षणिक सत्र 2024-25 में विद्यालय के शिक्षक मदन बत्रा ने अपने पिता नामदेव बत्रा के नाम से लगभग तीन लाख रुपये की लागत से एक कक्ष का निर्माण कर विद्यालय को समर्पित किया था। दोनों शिक्षकों के इस योगदान को क्षेत्र में सेवा, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है।

    विद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि यहां लगभग 160 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जिनमें अधिकांश बच्चे सपेरा बस्ती से आते हैं। वर्ष 2022 में इस विद्यालय को प्राथमिक से उच्च प्राथमिक स्तर में क्रमोन्नत किया गया था। वर्तमान में आठवीं तक की कक्षाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन विद्यालय में विद्यार्थियों के बैठने के लिए केवल पांच कक्ष उपलब्ध हैं, जबकि कुल आठ कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। विद्यालय में छह शिक्षक कार्यरत हैं।

    कमरों की कमी के कारण कई बार विद्यार्थियों को खुले स्थान पर पढ़ाई करनी पड़ती है या एक ही कक्ष में दो कक्षाओं का संचालन करना पड़ता है। विद्यालय प्रशासन एवं शिक्षकों ने जनप्रतिनिधियों और राज्य सरकार से अतिरिक्त कक्षों के निर्माण की मांग की है, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

    ग्रामीणों ने दोनों शिक्षकों की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि जब शिक्षक स्वयं भामाशाह बनकर विद्यालय के विकास में योगदान देते हैं, तो यह समाज के लिए प्रेरणादायी संदेश होता है। उनका मानना है कि ऐसे प्रयास सरकारी विद्यालयों के प्रति समाज का विश्वास मजबूत करते हैं और अन्य लोगों को भी शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए प्रेरित करते हैं।

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