वैश्विक संकट के बीच पीएम मोदी ने सोना खरीद कम करने की अपील की, अर्थव्यवस्था और रुपये को बताया चुनौती
नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से राष्ट्रहित में एक वर्ष तक सोना खरीदने से बचने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने वैश्विक अस्थिरता और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच विदेशी मुद्रा बचाने तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है और देश में इस्तेमाल होने वाला अधिकांश सोना विदेशों से आयात किया जाता है। ऐसे में बड़े स्तर पर सोना खरीदने से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में हर वर्ष लगभग 800 से 900 टन सोने की खपत होती है। देश में घरेलू उत्पादन बेहद कम होने के कारण ज्यादातर सोना आयात करना पड़ता है। भारत मुख्य रूप से स्विट्जरलैंड, यूएई, दक्षिण अफ्रीका और पेरू से सोना मंगाता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में विदेशी मुद्रा का संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने लोगों से गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं और अत्यधिक ईंधन खपत से भी बचने की अपील की।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार सोने के आयात पर डॉलर में भुगतान करना पड़ता है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ता है और व्यापार घाटा भी प्रभावित होता है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का गोल्ड इंपोर्ट बिल रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने की बात कही जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोने की खरीद में कमी आती है तो व्यापार घाटा कम करने, रुपये को स्थिर रखने और घरेलू निवेश को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।
हालांकि भारत में शादियों, त्योहारों और पारंपरिक अवसरों पर सोना खरीदना सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है। ऐसे में प्रधानमंत्री की यह अपील आर्थिक चुनौतियों के बीच राष्ट्रहित से जोड़कर देखी जा रही है।
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