सेवा, संस्कार और राष्ट्रीय चेतना के मूल्यों पर हुआ आत्मचिंतन
अलवर। भारत विकास परिषद की अलवर शाखा द्वारा 13 जुलाई रविवार को परिषद के स्थापना दिवस का आयोजन गरिमामय वातावरण में किया गया। समारोह का आयोजन रीजन संयुक्त महासचिव डॉ. शिव दयाल मंगल के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ, जिन्होंने अपने सारगर्भित संबोधन में परिषद द्वारा राष्ट्र निर्माण की दिशा में किए जा रहे सेवा, संस्कार और राष्ट्रीय भावना जागरण के कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
डॉ. मंगल ने कहा कि यदि बचपन में ही बच्चों के मन-मस्तिष्क में अच्छे संस्कारों का बीजारोपण कर दिया जाए, तो ऐसे बच्चे ही आगे चलकर संस्कारवान नागरिक बनते हैं, जो राष्ट्र को सही दिशा में ले जा सकते हैं। उन्होंने परिषद की गतिविधियों को न केवल समाज हितैषी बल्कि राष्ट्र-निर्माण की धुरी बताया।
अध्यक्षीय उद्बोधन और परिषद की गतिविधियाँ
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शाखा अध्यक्ष सुरेश गोयल ने सभी आगंतुकों और सम्माननीय सदस्यों का स्वागत किया तथा अलवर शाखा द्वारा संचालित सामाजिक, शैक्षणिक और सेवा गतिविधियों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि शाखा स्थानीय स्तर पर सतत रूप से संस्कार, सेवा और संस्कृति आधारित प्रकल्पों में संलग्न है।
स्थापना का उद्देश्य और परिषद का विस्तार
समारोह के संयोजक डॉ. राजीव सक्सेना ने परिषद की स्थापना, उसके उद्देश्य और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 1963 में स्थापित भारत विकास परिषद ने आज तक के 62 वर्षों में देशभर में सैकड़ों शाखाओं के माध्यम से सेवा के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य किए हैं। उन्होंने परिषद की विविध योजनाएं और सामाजिक प्रकल्पों की जानकारी देकर उपस्थित जनसमूह को प्रेरित किया।
संस्थापक डॉ. सूरज प्रकाश जी को श्रद्धांजलि
प्रांतीय संरक्षक हेमन्त जोशी ने इस अवसर पर परिषद के संस्थापक डॉ. सूरज प्रकाश को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका स्वप्न एक समरस, संस्कारित और समर्पित भारत का निर्माण करना था। आज स्थापना दिवस पर हम सभी को यह आत्ममंथन करना चाहिए कि क्या हम उनके उस स्वप्न को यथार्थ में बदलने की दिशा में समर्पित हैं। उन्होंने कहा कि केवल भाषण नहीं, बल्कि व्यवहार में उनके विचारों को उतारना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
संकल्प और भविष्य की दिशा
प्रांतीय अध्यक्ष रणवीर सिंह त्यागी ने परिषद की सभी शाखाओं से आह्वान किया कि स्थापना दिवस के इस पावन अवसर पर प्रत्येक शाखा यह संकल्प ले कि वे परिषद के लक्ष्य एवं उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए अनवरत रूप से प्रयासरत रहेंगी। उन्होंने परिषद के उज्जवल भविष्य की ओर बढ़ने का सार्थक संदेश दिया।
मार्गदर्शन और उत्साहवर्धन
रीजन संरक्षक डॉ. के.के. गुप्ता ने अपने प्रेरणादायी आशीर्वचन के माध्यम से शाखा सदस्यों का उत्साहवर्धन करते हुए कार्यों में गति लाने, आंतरिक समीक्षा करने और संगठनात्मक शक्ति को और अधिक मजबूत करने की दिशा में मार्गदर्शन दिया।
सांस्कृतिक प्रस्तुति और संचालन
समारोह की शुरुआत अमित गोयल द्वारा प्रस्तुत सुमधुर वंदे मातरम् से हुई, जिसने माहौल को राष्ट्रभक्ति से भर दिया। कार्यक्रम का सुंदर संचालन डॉ. कुमकुम कपूर और रमन सोनी द्वारा प्रभावशाली शैली में किया गया।
समारोह का अंत परिषद सदस्यों द्वारा प्रस्तुत विविध रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हुआ, जिसमें सभी सदस्यों ने भरपूर आनंद लिया। इस अवसर पर शाखा के सदस्यों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिसने आयोजन को और अधिक गरिमामय बना दिया।
कार्यक्रम के धन्यवाद ज्ञापन में सचिव राधेश्याम ने मुख्य अतिथि एवं समस्त अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा परिषद के कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
यह स्थापना दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि सेवा और संस्कार की पुनः प्रतिज्ञा का अवसर बन गया, जिसने सभी उपस्थितजनों को नई प्रेरणा और उत्साह से भर दिया।


