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    भिवाड़ी प्रदूषण मामले में कजारिया सेरामिक्स और सरकारी एजेंसियों को लगाई फटकार, दिए सख्त निर्देश

    हैदर अली की याचिका पर दिए निर्देश 

    राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने संयुक्त समिति की रिपोर्ट के आधार पर प्रदूषण नियंत्रण, कचरा प्रबंधन और सड़क निर्माण में सुधार के लिए व्यापक आदेश जारी किए।
     मिशनसच न्यूज,  अलवर । राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की सेंट्रल ज़ोन बेंच, भोपाल ने भिवाड़ी में फैले गंभीर वायु और जल प्रदूषण के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हैदर अली द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए, NGT ने प्रसिद्ध टाइल निर्माता कंपनी कजारिया सेरामिक्स लिमिटेड के साथ-साथ नगर परिषद, भिवाड़ी एकीकृत विकास प्राधिकरण (BIDA) और RIICO को प्रदूषण रोकने में विफलता के लिए फटकार लगाई है। अधिकरण ने एक संयुक्त समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर इन सभी संस्थाओं को प्रदूषण नियंत्रण के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने के सख्त निर्देश दिए हैं ।
    यह मामला तब सामने आया जब सामाजिक कार्यकर्ता हैदर अली ने भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र में फैक्ट्रियों से होने वाले प्रदूषण, विशेष रूप से कजारिया सेरामिक्स द्वारा फैलाए जा रहे वायु और जल प्रदूषण के खिलाफ NGT में याचिका दायर की। याचिका में समाचार पत्रों की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा गया था कि भिवाड़ी की हवा जहरीली हो चुकी है, जिससे लोगों को सांस की गंभीर बीमारियां हो रही हैं ।
    संयुक्त समिति की जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे:
    NGT के आदेश पर गठित एक उच्च-स्तरीय संयुक्त समिति ने अपनी जांच में कई गंभीर अनियमितताएं पाईं:
    कजारिया सेरामिक्स में उल्लंघन: समिति ने पाया कि कजारिया सेरामिक्स की तीनों इकाइयों में प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का घोर उल्लंघन हो रहा था। फैक्ट्री से निकलने वाला पार्टिकुलेट मैटर (PM) निर्धारित सीमा से काफी अधिक था। इसके अलावा, फैक्ट्री परिसर में स्लज (गाद) और सरसों की भूसी की राख को खुले में फेंका जा रहा था, जिससे धूल का गुबार उड़ रहा था। समिति ने यह भी पाया कि कंपनी की आवासीय कॉलोनी से निकलने वाले गंदे पानी को बिना ट्रीटमेंट के बागवानी के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था ।
    शहर में कचरे और गंदगी का अंबार: जांच में सामने आया कि पूरे भिवाड़ी शहर में ठोस और तरल कचरे का प्रबंधन पूरी तरह से ध्वस्त है। प्रतिदिन लगभग 200 टन कचरा निकलता है, लेकिन उसके निपटान की कोई उचित व्यवस्था नहीं है। जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं और नालियों में औद्योगिक और घरेलू गंदा पानी भरा रहता है ।
    सड़कों की धूल प्रदूषण का बड़ा कारण: आईआईटी कानपुर की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए समिति ने बताया कि भिवाड़ी के वायु प्रदूषण में 77% हिस्सा सड़क की धूल का है। कच्ची और टूटी सड़कें प्रदूषण को और बढ़ा रही हैं ।
    NGT के सख्त निर्देश:
    संयुक्त समिति की रिपोर्ट के निष्कर्षों को गंभीरता से लेते हुए, न्यायमूर्ति शेओ कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने निम्नलिखित प्रमुख निर्देश जारी किए:
    कजारिया सेरामिक्स को आदेश: कंपनी को तुरंत अपने प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों को अपग्रेड करने, कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान करने और सभी पर्यावरणीय नियमों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया गया है ।
    सरकारी एजेंसियों की जवाबदेही: नगर परिषद, BIDA और RIICO को भिवाड़ी की सभी सड़कों को पक्का करने, धूल को नियंत्रित करने के लिए नियमित रूप से पानी का छिड़काव करने और कचरे के निपटान के लिए तत्काल डंपिंग यार्ड की व्यवस्था करने को कहा गया है ।
    सीवेज ट्रीटमेंट: घरेलू और औद्योगिक गंदे पानी के प्रबंधन के लिए एक प्रभावी सीवेज नेटवर्क और नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के निर्माण में तेजी लाने का आदेश दिया गया है ।
    निगरानी और कार्रवाई: राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RSPCB) को नियमित रूप से क्षेत्र में प्रदूषण की निगरानी करने और नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। भिवाड़ी के जिला कलेक्टर को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के अनुपालन की निगरानी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है ।
    कजारिया सेरामिक्स का पक्ष:
    सुनवाई के दौरान कजारिया सेरामिक्स ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता दुर्भावना से कंपनी को परेशान कर रहा है। कंपनी ने दावा किया कि उसने सभी आवश्यक प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगाए हैं और प्रदूषण का मुख्य कारण शहर की खराब सड़कें और वाहनों का धुआं है । हालांकि, NGT ने इन दलीलों को दरकिनार करते हुए संयुक्त समिति की रिपोर्ट को आधार माना।

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