किसानों को मुआवजा नहीं, महिलाओं को लॉटरी से बाहर, मास्टर प्लान पर मंडराया संकट
मिशनसच न्यूज, भीलवाड़ा। शहर के नियोजित विकास की रीढ़ माने जाने वाले भीलवाड़ा मास्टर प्लान को लेकर अब नाराजगी खुलकर सामने आ गई है। प्रॉपर्टी डीलर्स एंड ब्रोकर्स एसोसिएशन ने मास्टर प्लान में हुए बदलावों को ‘विकास की आड़ में विनाश’ की तैयारी बताते हुए यूआईटी (नगर विकास न्यास) सचिव और अधिकारियों पर हठधर्मिता, मनमर्जी और नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए हैं।
पत्रकार वार्ता में एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि जोनल प्लान ई-2 में यूआईटी ने बिना सर्वे और बिना मौके का मुआयना किए बदलाव कर दिए, जो न केवल अव्यवस्थित शहरीकरण को जन्म देगा, बल्कि स्थानीय किसानों और आमजन की संपत्तियों को भी प्रभावित करेगा।
“यह विकास नहीं, विनाश की योजना है”
एसोसिएशन अध्यक्ष जगजीवन जायसवाल ने कहा कि “यूआईटी ने बंद कमरों में बैठकर मास्टर प्लान जैसे संवेदनशील दस्तावेज में परिवर्तन कर दिए। न जन सुनवाई हुई, न जनता की राय ली गई।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आवश्यक हुआ तो मामला मुख्यमंत्री और यूडीएच मंत्री के समक्ष उठाया जाएगा, और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय की शरण भी ली जाएगी।
एसोसिएशन ने लगाए ये गंभीर आरोप
बिना मौका रिपोर्ट और सुपरइंपोज किए हुए नक्शों के ज़ोनल प्लान ई-2 में बदलाव।
1200 फीट चौड़ी सड़क का प्रस्ताव, जो व्यावहारिक रूप से अव्यवहारिक और देश में सबसे चौड़ी सड़क बन सकती है।
पिछले 12 वर्षों से किसानों को मुआवजा नहीं दिया गया, जबकि उनकी भूमि प्लान में सम्मिलित कर ली गई।
महिला आवेदकों को लॉटरी योजना से बाहर कर दिया गया, पात्रता के नियमों को एकतरफा बदला गया।
आरक्षित दरों में 200 से 400 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी, जिससे आमजन पर आर्थिक बोझ बढ़ा।
अजमेर और भीलवाड़ा जैसे शहरों में अलग-अलग मापदंड, जैसे आवेदन शुल्क भीलवाड़ा में ₹2000, जबकि अजमेर में ₹1000।
यूआईटी ने करीब 20 करोड़ रुपये आवेदन शुल्क के रूप में जमा किए, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं।
“यूआईटी अधिकारियों को याद रखना होगा, यह शहर की संपत्ति है”
जायसवाल ने कहा कि न्यास अधिकारी खुद को मालिक समझने लगे हैं, जबकि यह शहर की संपत्ति है, जनता के हितों की संस्था है। उन्होंने मांग की कि हर सप्ताह यूआईटी में जनसुनवाई होनी चाहिए, ताकि नागरिकों की शिकायतें सीधे अधिकारी सुन सकें।
महिलाओं के साथ अन्याय का आरोप
एसोसिएशन पदाधिकारी राजकुमार टेलर ने लॉटरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि यूआईटी ने महिला आवेदकों को अयोग्य ठहराकर आवेदन रद्द कर दिए, जबकि उन्होंने समय पर सभी दस्तावेज और शुल्क जमा करवाया था। उन्होंने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा धोखा करार दिया।
राज्य सरकार एक ओर महिलाओं को सशक्त बनाने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर यूआईटी ने पात्र महिलाओं को लॉटरी से बाहर कर उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। साथ ही, आवेदन शुल्क में अंतर को लेकर भी उन्होंने दोहरा मापदंड बताया।
विधिक सलाहकार ने भी जताई आपत्ति
एसोसिएशन के विधिक सलाहकार सुनीत जागेटिया ने कहा कि यूआईटी ने राजस्व नक्शों, खसरे और आबादी की वास्तविकता को दरकिनार कर मनमाने तरीके से प्लान में परिवर्तन किया है। इससे पट्टे जारी हो चुकी जमीनें भी प्लान में दुबारा शामिल कर दी गईं, जिससे भविष्य में नियोजन और क्रियान्वयन दोनों असंभव हो जाएंगे।
भीलवाड़ा मास्टर प्लान को लेकर अब सवाल सिर्फ योजना तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि यह जनता के अधिकार, पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा बन गया है। प्रॉपर्टी डीलर्स एसोसिएशन ने जिस तरह से तथ्यों और आंकड़ों के साथ सवाल खड़े किए हैं, उससे स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में यह मामला विधिक और राजनीतिक स्तर तक पहुंच सकता है। सरकार और यूआईटी के लिए यह समय है कि वे संवाद और समाधान का रास्ता अपनाएं, अन्यथा यह विरोध और व्यापक रूप ले सकता है।