इंटैक भीलवाड़ा चैप्टर की पहल, आठ विद्यालयों के 84 विद्यार्थियों ने दिखाई रचनात्मक प्रतिभा
मिशनसच न्यूज, भीलवाड़ा। प्राकृतिक विरासत के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से भारतीय सांस्कृतिक निधि (इंटैक) भीलवाड़ा चैप्टर द्वारा राजेंद्र मार्ग विद्यालय में ‘ट्री ऑफ लाइफ’ विषय पर पोस्टर एवं निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में जिले के आठ विद्यालयों के 84 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी कल्पनाशीलता के माध्यम से प्रकृति प्रेम एवं संरक्षण का संदेश दिया।
कार्यक्रम का आयोजन इंटैक चेयरमैन अशोक सिंह ठाकुर एवं विरासत शिक्षा एवं संचार सेवा निदेशक पूर्णिमा दत्त के मार्गदर्शन में किया गया। प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य बच्चों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना और उन्हें पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरित करना रहा। विद्यालय परिसर में आयोजित इस प्रतियोगिता में बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था।
वृक्ष जीवन का मूल आधार – इंटैक कन्वीनर बाबूलाल जाजू
प्रतियोगिता के शुभारंभ अवसर पर इंटैक भीलवाड़ा कन्वीनर बाबूलाल जाजू ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण का आधार ही नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन का मूल स्रोत हैं। ‘ट्री ऑफ लाइफ’ की अवधारणा के माध्यम से बच्चों में यह भाव जागृत करना जरूरी है कि यदि वृक्ष सुरक्षित रहेंगे, तभी मानव जीवन भी सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा कि आज के समय में बढ़ते प्रदूषण और वनों की कटाई के कारण पर्यावरण असंतुलन की समस्या गंभीर होती जा रही है, ऐसे में नई पीढ़ी को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है।
चित्रों में उकेरी जीव-जंतुओं से भरी सजीव प्रकृति
प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने पेड़-पौधों के साथ उनमें निवास करने वाले कीटों, पक्षियों और जीव-जंतुओं का सजीव और कल्पनाशील चित्रण किया। किसी ने आम, नीम और अमरूद जैसे फलदार वृक्षों को जीवनदायिनी रूप में दर्शाया, तो किसी ने बबूल और पीपल जैसे छायादार वृक्षों को पर्यावरण के रक्षक के रूप में कागज पर उकेरा। बच्चों ने रंगों और रेखाओं के माध्यम से यह संदेश दिया कि प्रकृति और मानव का रिश्ता अटूट है।
चित्रकला के साथ-साथ विद्यार्थियों को 200 शब्दों का निबंध भी लिखना था। इन निबंधों में बच्चों ने वृक्षों के महत्व, जैव विविधता, पर्यावरण संरक्षण और भावी पीढ़ी के लिए हरित पृथ्वी के संकल्प पर अपने विचार व्यक्त किए। कई निबंधों में बच्चों ने ‘एक पेड़ – सौ जीवन’ जैसे प्रेरणादायक संदेश भी लिखे।
आठ विद्यालयों की रही सहभागिता
प्रतियोगिता में भीम.अं.आवासीय विद्यालय, राजेंद्र मार्ग विद्यालय, सेमुमा विद्यालय, राउमावि गुलमंडी, माहेश्वरी पब्लिक स्कूल, मयूर स्कूल, ईडन इंटरनेशनल स्कूल सहित आठ विद्यालयों के विद्यार्थियों ने सहभागिता की। सभी विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने बच्चों को मार्गदर्शन देकर प्रतियोगिता को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आयोजन में इंटैक टीम की सराहनीय भूमिका
इस आयोजन को सफल बनाने में इंटैक प्रतियोगिता प्रभारी गुमान सिंह पीपाड़ा एवं सुरेश सुराना की विशेष भूमिका रही। वहीं विद्यालय स्तर पर प्रधानाचार्य राजेंद्र सिंह गहलोत, अर्चना जोशी, सीमा शर्मा, रजनी बछेड़ा, स्नेहलता पारीक, विक्रम चौधरी, भाग्यश्री जैन और मीना त्रिवेदी का सराहनीय सहयोग रहा। सभी ने बच्चों को प्रकृति संरक्षण के महत्व को समझाने और उनकी रचनात्मकता को मंच प्रदान करने में सक्रिय योगदान दिया।
दिल्ली मुख्यालय करेगा विजेताओं का चयन
प्रतियोगिता में बनाए गए सभी चित्र एवं निबंधों को इंटैक दिल्ली मुख्यालय को भेजा जाएगा। वहां से देशभर से प्राप्त प्रविष्टियों में से 100 क्षेत्रीय एवं 10 राष्ट्रीय विजेताओं का चयन किया जाएगा। राष्ट्रीय स्तर पर चयनित विद्यार्थियों को ट्रॉफी प्रदान की जाएगी तथा उन्हें शैक्षणिक भ्रमण का अवसर भी मिलेगा। इससे बच्चों में पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ विरासत और संस्कृति के प्रति रुचि और अधिक प्रबल होगी।
बचपन से प्रकृति प्रेम का संस्कार जरूरी
कार्यक्रम के समापन अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि यदि बचपन से ही बच्चों में प्रकृति प्रेम और संरक्षण का संस्कार डाला जाए, तो भविष्य में पर्यावरण संतुलन को बनाए रखना संभव होगा। इंटैक द्वारा आयोजित यह प्रतियोगिता केवल कला या लेखन का मंच नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी को हरित सोच से जोड़ने की सशक्त पहल है।
प्रतियोगिता के अंत में विद्यार्थियों को सहभागिता के लिए प्रेरित किया गया और भविष्य में भी इस प्रकार की गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया गया। पूरा आयोजन पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति प्रेम से सराबोर नजर आया।
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