More
    Homeराजस्थानअलवरमकर संक्रांति पर दान और गौसेवा का संदेश: आर्षमति माताजी ने बताया...

    मकर संक्रांति पर दान और गौसेवा का संदेश: आर्षमति माताजी ने बताया जीवदया को सच्चा धर्म

    सुधासागर गौशाला में आयोजित दान संग्रह शिविर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

    मिशनसच न्यूज, अलवर। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर अलवर में धर्म, करुणा और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला। समाधिस्थ दिगम्बर जैनाचार्य ज्ञानसागर महाराज की सुशिष्या आर्षमति माताजी ने कहा कि मकर संक्रांति का पर्व केवल परंपरा का उत्सव नहीं, बल्कि दान और पुण्य अर्जन का श्रेष्ठ अवसर है। उन्होंने कहा कि दान से मनुष्य अपने पापकर्मों की निर्जरा कर सकता है और विशेष रूप से गौवंश के लिए किया गया दान सबसे बड़ा पुण्य माना गया है।

    वीर चौक स्थित दिगम्बर जैन सुधासागर गौशाला समिति, अलवर द्वारा आयोजित दान संग्रह शिविर में आर्षमति माताजी ने मंगल प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य प्रतिदिन अपने सांसारिक सुख-साधनों पर इच्छानुसार धन खर्च करता है, लेकिन मूक प्राणियों की रक्षा और उनके भोजन की चिंता बहुत कम लोग करते हैं। उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि यदि मनुष्य स्वयं को संवेदनशील प्राणी मानता है, तो उसे मूक जीवों के प्रति भी करुणा रखनी चाहिए। यही सच्चे अर्थों में मानव धर्म है।

    गौवंश संरक्षण सबसे बड़ा पुण्य कार्य

    आर्षमति माताजी ने अलवर के बगड़ तिराहा स्थित सुधासागर गौशाला समिति की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि यह गौशाला असहाय, बीमार और बूचड़खाने ले जाए जा रहे गौवंश को संरक्षण देकर उन्हें नया जीवन प्रदान कर रही है। यहां गौवंश की देखभाल, चिकित्सा, आहार और सुरक्षा की उत्तम व्यवस्था की गई है, जो समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।

    उन्होंने कहा कि गौसेवा केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि जीवदया का सर्वोच्च स्वरूप है। जो समाज मूक प्राणियों की रक्षा करता है, वही वास्तव में सभ्य और संस्कारित समाज कहलाता है।

    पक्षियों के लिए भी विशेष आवास और चिकित्सालय

    गौशाला समिति द्वारा जानकारी दी गई कि सुधासागर गौशाला में केवल गौवंश ही नहीं, बल्कि पक्षियों के संरक्षण के लिए भी विशेष पक्षी आवास और पक्षी चिकित्सालय की व्यवस्था है। घायल और असहाय पक्षियों का यहां उपचार कर उन्हें पुनः जीवन दिया जाता है। यह पहल जीवदया की भावना को और अधिक सशक्त बनाती है।

    गौतस्करों से मुक्त कराए गए गौवंश को मिलता नया जीवन

    कार्यक्रम में यह भी उल्लेख किया गया कि गौशाला में पलने वाले अधिकांश गौवंश वे हैं, जिन्हें पुलिस द्वारा गौतस्करों के कब्जे से मुक्त कराया गया। बूचड़खाने ले जाए जा रहे पशुओं को बचाकर पुलिस द्वारा सुधासागर गौशाला को सौंपा जाता है। इस पुनीत कार्य में गौसेवकों की अहम भूमिका रहती है, जो दिन-रात गौवंश की सुरक्षा और सेवा में लगे रहते हैं।

    समिति द्वारा भव्य अगवानी, श्रीफल भेंट कर किया अभिनंदन

    इस अवसर पर आर्षमति माताजी ससंघ की गौशाला समिति द्वारा भव्य अगवानी की गई। समिति के संरक्षक बच्चू सिंह जैन, अध्यक्ष अनिल जैन, उपाध्यक्ष शिखरचन्द जैन सहित अन्य पदाधिकारियों ने श्रीफल भेंट कर उनका अभिनंदन किया और आशीर्वाद प्राप्त किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु, समाजसेवी और नगरवासी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

    श्रद्धालुओं ने लिया गौसेवा का संकल्प

    मकर संक्रांति के इस पावन अवसर पर आयोजित दान संग्रह शिविर में नागरिकों ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया। श्रद्धालुओं ने आर्षमति माताजी के प्रवचनों से प्रेरणा लेकर गौसेवा, जीवदया और दान को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाने का संकल्प लिया। पूरा वातावरण धर्म, श्रद्धा और करुणा से सराबोर नजर आया।

    कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने समाज से आह्वान किया कि वे गौशाला जैसे सेवा प्रकल्पों में निरंतर सहयोग करें, ताकि मूक प्राणियों को सुरक्षित जीवन मिल सके। मकर संक्रांति पर किया गया दान कई गुना पुण्य प्रदान करता है और आत्मिक शांति देता है।

    मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
    https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1

    अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क

    https://missionsach.com/category/india

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here