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    मातृ गरिमा पर राष्ट्रीय मंथन: समृद्ध मातृत्व अभियान के सेमिनार में महिलाओं के स्वास्थ्य पर दिया गया जोर

    प्रजनन, स्वास्थ्य और मातृ गरिमा पर राष्ट्रीय सेमिनार, समृद्ध मातृत्व को जनआंदोलन बनाने का आह्वान

    भरतपुर। समृद्ध मातृत्व अभियान के तत्वावधान में प्रजनन, स्वास्थ्य एवं मातृ गरिमा विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में देशभर के सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि, केंद्रीय मंत्री, सांसद, जनप्रतिनिधि, चिकित्सा विशेषज्ञ तथा स्वयंसेवी संगठनों के सदस्य शामिल हुए। कार्यक्रम में समृद्ध भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता ने मुख्य वक्ता के रूप में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे।

    संतों और जनप्रतिनिधियों की रही उपस्थिति

    सेमिनार का शुभारंभ महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित कनेरी मठ के संत काड़सिद्धेश्वर ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने की। इस अवसर पर कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामैया, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय पासवान, लोकसभा सदस्य डॉ. जयंत कुमार रॉय, सांसद सुधाकर सिंह, स्पेशल ओलंपिक भारत की अध्यक्ष श्रीमती मल्लिका नद्देड़ा, राज्यसभा सदस्य धनंजय महाडिक, पूर्व सांसद प्रदीप गांधी तथा गांधी सेवा संस्थान के अध्यक्ष बसंत कुमार सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।

    मातृत्व को बताया राष्ट्र निर्माण की आधारशिला

    मुख्य वक्ता सीताराम गुप्ता ने कहा कि मातृत्व केवल जैविक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है। उन्होंने कहा कि जिस समाज में मातृत्व को सम्मान, सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलती हैं, वही समाज समृद्ध, संस्कारित और विकसित बनता है।

    उन्होंने कहा कि भारत को केवल मातृ मृत्यु दर और कुपोषण कम करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समृद्ध मातृत्व की व्यापक अवधारणा को अपनाना होगा। इसमें गर्भधारण से पूर्व परामर्श, सुरक्षित गर्भावस्था, संतुलित पोषण, गुणवत्तापूर्ण प्रसव सेवाएं, स्तनपान, प्रसवोत्तर देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक सहयोग और महिलाओं का आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण शामिल होना चाहिए।

    समग्र मातृ-शिशु स्वास्थ्य मॉडल पर दिया जोर

    सीताराम गुप्ता ने कहा कि भारत की प्राचीन संस्कृति में मातृत्व को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान, आयुष, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, पोषण, सामाजिक सहभागिता और तकनीकी नवाचार को एकीकृत कर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य का समग्र मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है।

    उन्होंने बताया कि समृद्ध मातृत्व अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय जनआंदोलन है, जिसका उद्देश्य प्रत्येक महिला को सम्मानजनक मातृत्व, प्रत्येक शिशु को स्वस्थ जीवन और प्रत्येक परिवार को समृद्ध भविष्य प्रदान करना है।

    जनभागीदारी बढ़ाने का आह्वान

    सेमिनार के दौरान सीताराम गुप्ता ने सांसदों, जनप्रतिनिधियों, नीति-निर्माताओं, चिकित्सा विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं और कॉर्पोरेट जगत से इस अभियान को जनभागीदारी के माध्यम से देश के प्रत्येक जिले और गांव तक पहुंचाने का आह्वान किया।

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