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    अलवर में मोदी सरकार के श्रम बिल के खिलाफ धरना, विरोध तेज

    अलवर में जिला श्रमिक कर्मचारी सामान्य समिति ने केंद्र सरकार के नए श्रम कानूनों के खिलाफ शहीद स्मारक पर सांकेतिक धरना दिया। श्रमिक संगठनों ने लेबर कोड वापस लेने की मांग उठाई।

    मिशनसच न्यूज अलवर।
    केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए श्रम कानूनों (लेबर कोड) के खिलाफ देशभर में चल रहे विरोध आंदोलन के तहत जिला श्रमिक कर्मचारी सामान्य समिति, अलवर की ओर से मंगलवार को शहर के शहीद स्मारक पर सांकेतिक धरना आयोजित किया गया। यह धरना दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक एक घंटे चला, जिसमें बड़ी संख्या में मजदूर, कर्मचारी और संगठित–असंगठित क्षेत्र से जुड़े श्रमिक शामिल हुए। समिति ने सरकार से चारों श्रम संहिताओं को तुरंत वापस लेने की मांग की।

    समिति के संयोजक तेजपाल सैनी ने बताया कि यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर एकजुट होकर चलाया जा रहा है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार ने जिन चार नए लेबर कोड को लागू किया है, वे श्रमिकों की सुरक्षा, अधिकारों और रोजगार की स्थिरता पर सीधा असर डालते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले पाँच साल से श्रमिक संगठन सरकार से बातचीत की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज़ को सुनने के बजाय लगातार अनदेखा किया जा रहा है।

    तेजपाल सैनी ने आरोप लगाया कि “मोदी सरकार द्वारा लागू किए गए श्रम कानून श्रमिकों पर भारी बोझ डालते हैं। इससे मजदूरों, कर्मचारियों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की स्थिति और कमजोर होगी। सरकार ने जिन सुधारों को विकास के नाम पर लागू किया है, वे वास्तव में बड़े उद्योगपतियों को राहत देने वाले हैं, जबकि मजदूरों के हितों को नुकसान पहुंचाने वाले।”

    धरने का मुख्य कारण क्या है?

    धरने में शामिल श्रमिक संगठनों ने बताया कि चारों नई श्रम संहिताएँ—

    1. वेज कोड

    2. औद्योगिक संबंध कोड

    3. सामाजिक सुरक्षा कोड

    4. व्यावसायिक सुरक्षा व स्वास्थ्य कोड

    मूल रूप से श्रमिकों के पारंपरिक अधिकारों को कमजोर करने का काम करती हैं।

    संगठन ने कुछ प्रमुख आपत्तियां गिनाईं:

    1. नौकरी की सुरक्षा कम होगी

    नए प्रावधानों से आसानी से छंटनी और ठेका प्रणाली को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थाई रोजगार कम होंगे।

    2. काम के घंटे बढ़ेंगे

    काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 तक करने की अनुमति से कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और आर्थिक–सामाजिक असुरक्षा बढ़ेगी।

    3. सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में कटौती की आशंका

    नई संरचना में कर्मचारियों के बीमा, पेंशन और अन्य सुरक्षा लाभों पर असर पड़ सकता है।

    4. उद्योगों को बढ़ती छूट से शोषण की संभावना

    कई नियमों को आसान करने से छोटे और मध्यम श्रमिक वर्ग के शोषण की संभावना बढ़ जाएगी।

    संगठन का कहना है कि इन कोडों से उद्योगपतियों को छूट और मजदूरों को नुकसान होगा। इसी कारण देशभर में श्रमिक संगठन संयुक्त रूप से विरोध दर्ज करा रहे हैं।

    सरकार को चेतावनी: आंदोलन और तेज होगा

    धरने में मंच से बोलते हुए संयोजक तेजपाल सैनी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने श्रम संहिताओं को वापस नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष मजदूरों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की लड़ाई है, जिसे किसी भी कीमत पर जारी रखा जाएगा।

    सैनी ने कहा, “हम शांतिपूर्वक विरोध कर रहे हैं, लेकिन यदि सरकार ने संवाद नहीं किया तो हमें राष्ट्रव्यापी आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। यह सिर्फ कानून का विरोध नहीं, बल्कि मजदूरों के भविष्य की लड़ाई है।”

    धरने के अंत में श्रमिकों ने एक स्वर में सरकार से लेबर कोड वापस लेने की मांग दोहराई।

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