More
    Homeराज्यनई दिल्लीयारी अभियान से यमुना संरक्षण का संदेश, मॉडर्न स्कूल के विद्यार्थियों की...

    यारी अभियान से यमुना संरक्षण का संदेश, मॉडर्न स्कूल के विद्यार्थियों की पहल बनी मिसाल

    कार्यक्रम में जलपुरुष राजेंद्र सिंह बोले— यारी अभियान जैसे प्रयास देश के हर विद्यालय में होने चाहिए

    नई दिल्ली। मॉडर्न स्कूल, वसंत विहार में ‘यारी’ (यमुना रिवर इनिशिएटिव) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विद्यालय पिछले एक वर्ष से यमुना नदी के पुनर्जीवन, संरक्षण और उसे स्वच्छ एवं सदानीरा बनाने के उद्देश्य से जन-जागरूकता अभियान चला रहा है। इस पहल में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी संदेश दिया।

    कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी के माध्यम से यमुना नदी से जुड़े विभिन्न विषयों पर शोध, मॉडल और प्रस्तुतीकरण प्रदर्शित किए। प्रदर्शनी में यमुना पर बढ़ते प्रदूषण, नदी के पुनर्जीवन की संभावनाओं तथा सरकार और समाज की भूमिका को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया।

    करीब दो घंटे तक प्रदर्शनी का अवलोकन करने के बाद जलपुरुष राजेंद्र सिंह ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि “मॉडर्न स्कूल अब वास्तव में आधुनिक राह पर चल पड़ा है। आधुनिक वही है जो समय की चुनौतियों को समझकर उनके समाधान खोजने का प्रयास करे।” उन्होंने कहा कि विद्यालय ने यमुना संकट को समाज के सामने प्रभावी ढंग से रखा है और ‘यारी’ अभियान के माध्यम से लोगों को जोड़ने की प्रेरणादायक शुरुआत की है। ऐसे अभियान देश के सभी विद्यालयों में शुरू होने चाहिए।

    राजेंद्र सिंह ने कहा कि भारत में नदियों के प्रदूषण की शुरुआत वर्ष 1932 में हुई थी, जब बनारस के तत्कालीन कमिश्नर हॉकिंस ने तीन गंदे नालों का पानी सीधे गंगा में प्रवाहित करने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि आजादी के करीब 80 वर्ष बाद भी नदियों से यह कलंक पूरी तरह नहीं मिट पाया है।

    उन्होंने कहा कि जब व्यवस्था मनुष्य को प्रकृति से दूर कर देती है, तब समाज को स्वयं आगे आकर जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। मॉडर्न स्कूल के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने यमुना के प्रति अपने व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने की जो पहल की है, वह पूरे देश के लिए अनुकरणीय है।

    जलपुरुष ने नदियों और पर्वतों के संरक्षण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए कहा कि यदि भविष्य सुरक्षित रखना है तो नदियों को स्वच्छ और सदानीरा बनाना तथा पर्वतों का संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

    उन्होंने विद्यालय परिसर में अरावली पर्वतमाला के संरक्षण के प्रयासों की भी सराहना की और सुझाव दिया कि “आओ यमुना को जानें” की तर्ज पर “आओ अरावली को जानें” अभियान भी शुरू किया जाए, ताकि विद्यार्थी विश्व की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में शामिल अरावली के महत्व को समझ सकें।

    अपने संबोधन के अंत में राजेंद्र सिंह ने कहा कि मॉडर्न स्कूल का यह प्रयास 21वीं सदी में केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि वास्तविक ‘विद्या’ को पुनर्स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि पुस्तक आधारित शिक्षा के साथ अनुभव, श्रम और प्रकृति से जुड़ाव ही वास्तविक परिवर्तन का आधार बन सकता है।

    उन्होंने विश्वास जताया कि ‘यारी’ अभियान पर्यावरणीय क्रांति के बीज बो रहा है और भविष्य में यमुना के साथ-साथ अरावली संरक्षण का आंदोलन भी इसी तरह आगे बढ़ेगा। उन्होंने इस दिशा में हरसंभव सहयोग का आश्वासन भी दिया।

    मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
    https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1

    अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क

    https://missionsach.com/category/india

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here