वन विभाग की उदासीनता पर एनजीटी का कड़ा रुख, पीसीसीएफ जयपुर से जवाब तलब
मिशनसच न्यूज, भीलवाडा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) भोपाल ने राजस्थान में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा राजमार्गों के निर्माण एवं चौड़ीकरण के दौरान काटे गए लाखों पेड़ों के बदले निर्धारित शर्तों के अनुसार 3 गुना, 5 गुना एवं 10 गुना पौधारोपण नहीं किए जाने के मामले में वन विभाग की गंभीर उदासीनता पर कड़ा रुख अपनाया है। इस मामले में लगभग 8.5 लाख पौधे नहीं लगाए जाने का आरोप है।
पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू द्वारा अधिवक्ता लोकेन्द्र सिंह कच्छावा के माध्यम से दायर जनहित याचिका संख्या 87/2025 की सुनवाई करते हुए एनजीटी ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ), जयपुर को शीघ्र जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। माननीय न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह एवं विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद पीसीसीएफ जयपुर की ओर से अब तक कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया है।
एनजीटी ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आदेश दिया है कि वह एक सप्ताह के भीतर प्रधान मुख्य वन संरक्षक को नोटिस की तामील कराए। साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा वन विभाग में जमा कराई गई पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि के उपयोग का पूरा विवरण दो सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकरण ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समयसीमा में जवाब दाखिल नहीं किया गया, तो प्रधान मुख्य वन संरक्षक, जयपुर को अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।
याचिकाकर्ता बाबूलाल जाजू ने एनजीटी के इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि प्रदेश में सड़कों के चौड़ीकरण के दौरान काटे गए विशालकाय लाखों पेड़ों के बदले पौधारोपण एवं उनके रखरखाव से संबंधित निर्देशों की पूर्ण पालना नहीं होने के कारण उन्हें पुनः जनहित याचिका दायर करनी पड़ी।
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