अलवर–मथुरा रेलखंड की बदहाल स्थिति से लेकर दिल्ली के लिए लोकल ट्रेनों की कमी तक, लंबी दूरी की नई ट्रेनों का भी अभाव
अलवर। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का महत्वपूर्ण जिला, औद्योगिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र और देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र होने के बावजूद अलवर रेल सुविधाओं के मामले में आज भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है। जिले की बड़ी आबादी को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और पूर्वी भारत के प्रमुख शहरों तक जाने के लिए पर्याप्त एवं सुविधाजनक रेल सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं।

रेल विकास संघर्ष समिति, अलवर का कहना है कि अलवर को केवल कुछ सीमित रेल सेवाओं तक सीमित रखने के बजाय इसकी भौगोलिक स्थिति, यात्री आवश्यकता, पर्यटन, उद्योग और NCR से जुड़े महत्व को देखते हुए व्यापक रेल नेटवर्क विकसित किया जाना चाहिए।
अलवर–मथुरा रेलखंड सबसे बड़ी चुनौती
अलवर–मथुरा रेलमार्ग वर्षों से क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग रहा है, लेकिन इस मार्ग पर यात्री ट्रेनों की संख्या और सुविधाओं का विस्तार अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं हो पाया है। यह मार्ग अलवर, गोवर्धन, मथुरा और आगे उत्तर प्रदेश के प्रमुख क्षेत्रों को जोड़ने की क्षमता रखता है।
रेल विकास संघर्ष समिति का कहना है कि इस रेलखंड के दोहरीकरण की दिशा में तेजी से काम होना चाहिए, लेकिन जब तक दोहरीकरण पूरा नहीं होता, तब तक उपलब्ध सिंगल लाइन क्षमता, सिग्नलिंग व्यवस्था, क्रॉसिंग स्टेशन, ट्रेन पाथ और परिचालनिक संभावनाओं का तकनीकी अध्ययन कर अतिरिक्त यात्री सेवाएं चलाने की संभावनाएं भी तलाशनी चाहिए।
हावड़ा, अयोध्या, झांसी और ग्वालियर के लिए सीधी ट्रेनों की कमी
अलवर से देश के कई महत्वपूर्ण शहरों के लिए सीधी रेल कनेक्टिविटी का अभाव आज भी बड़ी समस्या है। हावड़ा/कोलकाता, अयोध्या, झांसी, ग्वालियर और चित्रकूट जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक, ऐतिहासिक, औद्योगिक एवं व्यावसायिक क्षेत्रों के लिए अलवर से पर्याप्त सीधी रेल सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं।
इन शहरों तक पहुंचने के लिए यात्रियों को कई बार दूसरे स्टेशनों पर ट्रेन बदलनी पड़ती है या सड़क मार्ग का सहारा लेना पड़ता है। इससे यात्रियों का समय और खर्च दोनों बढ़ते हैं।
समिति का मानना है कि अलवर–मथुरा रेलखंड और आगे उत्तर प्रदेश की रेल लाइनों की क्षमता का बेहतर उपयोग करते हुए हावड़ा, ग्वालियर, झांसी, चित्रकूट, अयोध्या आदि क्षेत्रों के लिए नई अथवा विस्तारित रेल सेवाओं की योजना बनाई जा सकती है।
दिल्ली के लिए स्थानीय यात्रियों को भी पर्याप्त सुविधा नहीं
अलवर की दिल्ली से दूरी अधिक नहीं होने के बावजूद प्रतिदिन बड़ी संख्या में नौकरी, व्यापार, शिक्षा, चिकित्सा एवं अन्य आवश्यकताओं के लिए दिल्ली–NCR आने-जाने वाले यात्रियों को पर्याप्त स्थानीय/कम्यूटर रेल सेवाओं की कमी का सामना करना पड़ता है।
अलवर–दिल्ली के बीच अधिक संख्या में नियमित लोकल/एमईएमयू/कम्यूटर सेवाओं की आवश्यकता है, ताकि अलवर के साथ-साथ राजगढ़, मालाखेड़ा, खैरथल, बहरोड़ क्षेत्र सहित आसपास के यात्रियों को भी राहत मिल सके।
दौसा–गंगापुर सिटी नई रेल लाइन से अलवर को क्यों जोड़ा जाए?
दौसा–गंगापुर सिटी नई रेल लाइन के निर्माण से राजस्थान के रेल नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण नया मार्ग जुड़ा है। रेल विकास संघर्ष समिति का मानना है कि इस नए मार्ग का लाभ अलवर को भी मिलना चाहिए।
समिति की मांग है कि अलवर–रेवाड़ी–दौसा–गंगापुर सिटी–कोटा मार्ग से नई यात्री ट्रेनों की संभावनाओं का अध्ययन किया जाए। इसके माध्यम से अलवर को कोटा तथा आगे इंदौर जैसे महत्वपूर्ण शहरों से जोड़ने वाली रेल सेवा विकसित की जा सकती है।
इसी क्रम में अलवर–रेवाड़ी–दौसा–गंगापुर सिटी–कोटा–इंदौर के बीच नई ट्रेन चलाने की मांग भी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे अलवर को राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी हिस्से और मध्यप्रदेश से बेहतर रेल संपर्क मिल सकेगा।
अलवर को चाहिए व्यापक रेल विजन
रेल विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष कमल कान्त खड़िया का कहना है कि अलवर की रेल समस्या केवल एक-दो ट्रेनों की मांग तक सीमित नहीं है। जरूरत एक समग्र रेल विकास योजना की है, जिसमें—
अलवर–मथुरा रेलखंड का दोहरीकरण एवं क्षमता विस्तार
अलवर–दिल्ली के बीच अधिक लोकल/कम्यूटर ट्रेनें
हावड़ा/कोलकाता के लिए सीधी रेल सेवा
अयोध्या के लिए सीधी रेल सेवा
ग्वालियर–झांसी–चित्रकूट क्षेत्र के लिए रेल संपर्क
दौसा–गंगापुर सिटी–कोटा के रास्ते अलवर को दक्षिण राजस्थान से जोड़ना
कोटा–इंदौर क्षेत्र के लिए नई रेल सेवा की संभावना
अलवर–गोवर्धन–मथुरा रेलमार्ग पर यात्री सुविधाओं एवं सेवाओं का विस्तार
जैसी मांगों को एक साथ लेकर रेलवे के समक्ष प्रभावी रूप से रखा जाना चाहिए।
अलवर को केवल गुजरने वाली ट्रेनों का स्टेशन नहीं, बल्कि मजबूत रेल नेटवर्क का केंद्र बनाया जाए
समिति का कहना है कि अलवर की भौगोलिक स्थिति इसे दिल्ली–राजस्थान–उत्तर प्रदेश–मध्यप्रदेश के बीच एक महत्वपूर्ण रेल कड़ी बनाने की क्षमता रखती है। इसके बावजूद कई महत्वपूर्ण शहरों के लिए सीधी रेल सेवाओं का अभाव और स्थानीय यात्रियों के लिए सीमित विकल्प चिंता का विषय है।
रेल विकास संघर्ष समिति ने रेलवे मंत्रालय, रेलवे बोर्ड, उत्तर पश्चिम रेलवे तथा जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि अलवर की वर्तमान रेल क्षमता, यात्री मांग और भविष्य की आवश्यकता का व्यापक अध्ययन कर एक दीर्घकालीन रेल विकास योजना तैयार की जाए।
समिति का कहना है कि अलवर की जनता को बेहतर रेल सुविधा उसका अधिकार है और इसके लिए जनप्रतिनिधियों, रेलवे तथा नागरिक संगठनों को मिलकर ठोस प्रयास करने होंगे।
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