वंदे गंगा अभियान के तहत जोहड़, मैजिक पिट और चारागाह विकास से बढ़ा भूजल स्तर व हरियाली
अलवर। भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में गंगा दशहरा के पावन अवसर पर शुरू किए गए “वंदे गंगा जल संरक्षण-जन अभियान” से जिले में जल एवं पर्यावरण संरक्षण को लेकर सकारात्मक माहौल बना है। अभियान के तहत वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों की साफ-सफाई, पारंपरिक जलाशयों के पुनरुद्धार और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियां 5 जून तक संचालित की जा रही हैं।
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों और जलाशयों के जीर्णोद्धार को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह दिखाई दे रहा है। रामगढ़ ब्लॉक के गांव बगड़ राजपूत में पीएम केएसवाई योजना के तहत करीब 29 लाख रुपये की लागत से तीन जोहड़ों का निर्माण कराया गया है, जिनकी क्षमता लगभग 24 लाख लीटर पानी संग्रहण की है।
इसी गांव में करीब 50 लाख रुपये की लागत से 75 बीघा गोचर भूमि पर चारागाह विकास कार्य भी किए गए हैं। यहां करीब साढ़े चार हजार फलदार एवं छायादार पौधे लगाए गए हैं और मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था हेतु घास भी विकसित की गई है। पौधों की सिंचाई के लिए सोलर पैनल आधारित बोरिंग स्थापित की गई है, जिससे बिजली की बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है।
गांव में पंचायत भवन के पास पुराने अनुपयोगी बोरिंग को रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से जोड़ा गया है। वहीं कई घरों में स्वप्रेरणा से सॉक पिट और मैजिक पिट बनाए गए हैं, जिससे बारिश का पानी जमीन में समाहित होकर भूजल स्तर को बढ़ा रहा है और कीचड़ की समस्या से भी राहत मिली है।
गांव निवासी अमित सिंह चौहान, नीलम देवी, ज्योति देवी और पुष्पा देवी ने बताया कि जोहड़ों के निर्माण से गांव के जल स्तर में सुधार हुआ है और मवेशियों के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ी है। वहीं पवन यादव और आशु खान ने कहा कि चारागाह विकास कार्यों से हरियाली बढ़ी है तथा गोचर भूमि पर अतिक्रमण की समस्या में भी कमी आई है।
टहला तहसील स्थित मंगलसर बांध पर आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम के बाद ग्रामीणों में जल संरक्षण को लेकर नई जागरूकता देखने को मिल रही है। ग्रामीणों ने राज्य सरकार के इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इससे जल संरक्षण के साथ पर्यावरण सुरक्षा को भी मजबूती मिली है।
जिले में पिछले दो वर्षों में जल संचय जन भागीदारी अभियान और मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0 के तहत करीब 40 हजार जल संरचनाएं तैयार की गई हैं। इनमें लगभग 35 हजार 200 संरचनाएं जल संचय जन भागीदारी अभियान तथा करीब साढ़े 4 हजार संरचनाएं मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के तहत विकसित हुई हैं।
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