लक्ष्मणगढ़ में 25 वार्डों की तस्वीर साफ होते ही सियासी सरगर्मी तेज, दावेदारों ने टिकट के लिए जोड़-तोड़ और प्रचार शुरू किया
लक्ष्मणगढ़। नगरीय निकाय चुनाव के लिए वार्ड पार्षद पदों के आरक्षण की लॉटरी निकलने के साथ ही लक्ष्मणगढ़ कस्बे में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल गए हैं। 25 वार्डों में एससी, एसटी, ओबीसी, महिला और सामान्य अनारक्षित वार्डों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद संभावित प्रत्याशियों ने चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। लॉटरी के परिणाम सामने आते ही कहीं खुशी तो कहीं मायूसी का माहौल देखने को मिल रहा है।
किस वार्ड से किस वर्ग का प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतर सकेगा, यह तस्वीर साफ होने के बाद लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे दावेदारों के समीकरण भी बदल गए हैं। कई संभावित प्रत्याशियों को अब अपने वार्ड के बजाय पड़ोसी वार्डों में नई संभावनाएं तलाशनी पड़ रही हैं।
आरक्षण से बदले चुनावी समीकरण
लक्ष्मणगढ़ नगरपालिका के गठन के बाद पहली बार होने जा रहे नगरपालिका चुनाव को लेकर कस्बे के लोगों में खासा उत्साह है। वार्ड आरक्षण की लॉटरी ने चुनावी तस्वीर को और रोचक बना दिया है। वहीं नगरपालिका अध्यक्ष पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित होने से अध्यक्ष पद की दौड़ में भी नए राजनीतिक समीकरण बनना तय माना जा रहा है।
आरक्षण बदलने से कई पुराने और दिग्गज दावेदारों के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। जिन वार्डों में वे लंबे समय से अपनी राजनीतिक जमीन तैयार कर रहे थे, उनमें से कई अब दूसरी श्रेणी के लिए आरक्षित हो गए। ऐसे में कुछ नेताओं को नए वार्ड की तलाश करनी पड़ रही है, जबकि कुछ दावेदारों के चुनावी मैदान से बाहर होने की स्थिति बन गई है।
किसी के सपने टूटे तो किसी के चेहरे खिले
लॉटरी के परिणाम सामने आते ही कस्बे में राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। जिन वार्डों में संभावित प्रत्याशी लंबे समय से मतदाताओं से संपर्क कर रहे थे, उनमें आरक्षण बदलने से कई दावेदारों के समीकरण बिगड़ गए।
वहीं जिन वार्डों का आरक्षण उनकी उम्मीद के मुताबिक आया है, वहां संभावित प्रत्याशियों में उत्साह नजर आ रहा है। खासकर युवा दावेदारों ने अपनी चुनावी तैयारियों को तेज कर दिया है।
कस्बे में अब राजनीतिक माहौल कुछ ऐसा है कि कहीं खुशी तो कहीं गम की स्थिति दिखाई दे रही है। कई दावेदार पड़ोसी वार्डों में अपनी संभावनाएं तलाश रहे हैं और स्थानीय मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुट गए हैं।
सोशल मीडिया पर शुरू हुआ प्रचार
वार्ड आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होते ही संभावित प्रत्याशियों ने सोशल मीडिया के जरिए अपना प्रचार-प्रसार शुरू कर दिया है। फेसबुक, व्हाट्सऐप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दावेदार अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं।
इसके साथ ही राजनीतिक दलों से टिकट हासिल करने के लिए दावेदारों ने अपने स्तर पर संपर्क और राजनीतिक जोड़-तोड़ शुरू कर दी है। पार्टियों के सामने भी ऐसे चेहरों की तलाश की चुनौती है, जिनकी मतदाताओं के बीच मजबूत पकड़ हो और जो चुनाव में जीत दिलाने की क्षमता रखते हों।
सड़क, पानी और सफाई बनेंगे प्रमुख मुद्दे
वार्ड आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद अब आम जनता के बीच भी स्थानीय समस्याओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। संभावित प्रत्याशी मतदाताओं से व्यक्तिगत संपर्क के साथ सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपनी पहुंच बनाने में जुटेंगे।
कस्बे में सड़क, पेयजल और सफाई जैसे स्थानीय मुद्दे चुनाव में प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। दावेदार इन मुद्दों को लेकर मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेंगे।
अब आरक्षण की तस्वीर साफ होने के बाद लक्ष्मणगढ़ में चुनावी बिसात बिछने लगी है। आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों द्वारा प्रत्याशियों के चयन और टिकट वितरण के साथ ही कस्बे की सियासत और अधिक गरमाने की संभावना है।
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