राज्य सरकार की लापरवाही और विश्वविद्यालय प्रशासन की बेपरवाही पर उठाए सवाल
जयपुर, । राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के स्थापना दिवस को भुला दिए जाने को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक करार दिया है। उन्होंने इसे न केवल प्रशासनिक लापरवाही बताया, बल्कि राज्य सरकार की अकर्मण्यता का उदाहरण भी बताया।
नेता प्रतिपक्ष जूली ने कहा कि सरकार को तो कुलपति का नाम बदलकर “कुलगुरु” करना याद रहा, लेकिन प्रदेश के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस — 14 जुलाई, जिसे 1962 में शेरे-ए-राजस्थान और पूर्व मुख्यमंत्री जयनारायण व्यास के सम्मान में स्थापित किया गया था — को पूरी तरह से भुला दिया गया। यह दर्शाता है कि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को न तो शैक्षणिक गरिमा की चिंता है और न ही ऐतिहासिक महत्व की।
जूली ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले पाँच महीनों से विश्वविद्यालय में कुलगुरु और रजिस्ट्रार के पद कार्यवाहक अधिकारियों के भरोसे चल रहे हैं, जो अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से न तो स्थायी नियुक्तियां की गईं और न ही प्रशासनिक निगरानी सुनिश्चित की गई, जिसके चलते यह लापरवाही सामने आई।
नेता प्रतिपक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम को शिक्षा और विश्वविद्यालय की गरिमा का अपमान बताते हुए कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की प्रतिमा, जो विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित है, और जयनारायण व्यास की प्रतिमा, जो विश्वविद्यालय के बाहर लगी हुई है, दोनों की उचित देखभाल तक नहीं की जा रही है। यह न केवल इन महापुरुषों का, बल्कि शिक्षा और संस्कृति का भी अपमान है।
जूली ने सरकार से मांग की है कि वह इस गंभीर लापरवाही की जिम्मेदारी तय करे और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ उचित कार्रवाई सुनिश्चित करे ताकि भविष्य में ऐसे ऐतिहासिक और गरिमामयी अवसरों को भुलाया न जाए।


