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    विहार करते सड़क हादसे में समाधिमरण: रीवा के पास आर्यिका श्री श्रुतमति माताजी का निधन

    विहार के दौरान भारी वाहन की चपेट में आईं विदुषी साध्वी, उपसममति माताजी गंभीर घायल

    कठूमर। आचार्य विद्यासागर जी महाराज की शिष्या और परम विदुषी आर्यिका श्रुतमति माताजी का रीवा के समीप एक सड़क दुर्घटना में समाधिमरण हो गया। हादसे में संघस्थ आर्यिका उपसममति माताजी गंभीर रूप से घायल हो गईं, जिनका उपचार जारी है।

    विहार के दौरान श्रुतमति माताजी का निधन
    विहार के दौरान श्रुतमति माताजी का निधन

    प्राप्त जानकारी के अनुसार माताजी संघ मंगलवार सुबह जंगल की ओर विहार कर रहा था। इसी दौरान एक तेज रफ्तार भारी वाहन की चपेट में आने से आर्यिका श्रुतमति माताजी का आकस्मिक निधन हो गया। दुर्घटना में संघ की दो अन्य आर्यिकाएं बाल-बाल बच गईं। वर्तमान में माताजी संघ आर्यिका सौम्यमति माताजी के सान्निध्य में विहाररत था।

    जानकारी के अनुसार आर्यिका श्रुतमति माताजी ने 13 फरवरी 2006 को सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में आचार्य विद्यासागर महाराज के कर-कमलों से आर्यिका दीक्षा ग्रहण की थी। इससे पूर्व 29 मई 1998 को भाग्योदय तीर्थ, सागर में उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लिया था।

    अत्यंत उच्च शिक्षित माताजी ने एमएससी मानव शास्त्र और एमए संस्कृत में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की थी। वे मूलतः सागर नगर के रामपुरा वार्ड की निवासी थीं। समाजसेवी मुकेश जैन ढाना ने बताया कि माताजी के गृहस्थ अवस्था के बड़े भाई मुनि अचलसागर महाराज के रूप में आचार्य संघ में दीक्षित हैं और वर्तमान में तारादेही, जिला दमोह में विराजमान हैं।

    घटना की पुष्टि माताजी के गृहस्थ अवस्था के भाई आलोक जैन ने भी की है। इस दुखद समाचार के बाद जैन समाज में शोक की लहर दौड़ गई। समाजजनों ने माताजी के समाधिमरण पर विनयांजलि अर्पित करते हुए गहरा दुख व्यक्त किया।

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