राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की भूमिका अहम, बेटियों के सम्मान से ही शिक्षक दिवस होगा सार्थक
भीलवाड़ा। माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में चल रहे ‘विश्व शांति कल्याण’ चातुर्मास के तहत शनिवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर दैनिक सत्संग में शिक्षक की भूमिका और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर विशेष चर्चा हुई। अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाधीश्वर जगद्गुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाता है। शिक्षक की एक छोटी सी भूल का प्रभाव केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका असर पूरे समाज और राष्ट्र पर पड़ सकता है।
आचार्यश्री ने कहा कि शिक्षक बच्चों के जीवन को संवारने के साथ उनके भीतर छिपे गुणों और प्रतिभाओं को निखारने का कार्य करता है। जो व्यक्ति अपने शिक्षक को परमात्मा का स्वरूप मानकर उनके प्रति श्रद्धा और निष्ठा रखता है, उसकी प्रगति को कोई रोक नहीं सकता।
मां बच्चे की पहली शिक्षक
आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि मां बच्चे की पहली शिक्षक होती है। मां से मिलने वाले संस्कार ही बच्चे के व्यक्तित्व की नींव रखते हैं। उन्होंने कहा कि वीर शिवाजी और महाराणा प्रताप जैसे महापुरुषों के जीवन निर्माण में मातृ संस्कारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
उन्होंने समय को भी सबसे बड़ा शिक्षक बताते हुए कहा कि जीवन में आने वाली परिस्थितियां मनुष्य को लगातार कुछ न कुछ सिखाती रहती हैं। व्यक्ति को प्रत्येक परिस्थिति से सीख लेकर अपने जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए।
बेटियों के प्रति भेदभाव खत्म करने का आह्वान
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का स्मरण करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि उनका चिंतन शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित था। उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस और हमारे अन्य पर्व तभी वास्तविक रूप से सार्थक होंगे, जब समाज से बेटियों के प्रति भेदभाव और कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराइयों का पूरी तरह अंत होगा।
उन्होंने कहा कि बेटियां समाज की शक्ति और प्रतिभा का महत्वपूर्ण आधार हैं। मीराबाई, रानी लक्ष्मीबाई, द्रौपदी, अनुसूया, हाड़ा रानी और कल्पना चावला जैसी प्रतिभाओं ने समाज और देश का गौरव बढ़ाया। बेटियों को समान अवसर और शिक्षा देकर ही समाज की वास्तविक प्रगति संभव है।
फाइनेंस के लड्डु पुस्तक के दूसरे संस्करण का विमोचन
सत्संग के दौरान आचार्यश्री ने लेखक कपिल लड्ढा की पुस्तक ‘फाइनेंस के लड्डु’ के द्वितीय संस्करण का विमोचन भी किया। इस अवसर पर संतों और चातुर्मास समिति के पदाधिकारी मौजूद रहे। बताया गया कि पुस्तक से प्राप्त राशि सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित की जाएगी।
13 से 20 सितंबर तक होगा भागवत ज्ञान सप्ताह
आचार्य रामदयालजी महाराज ने बताया कि माणिक्यनगर रामद्वारा में 13 से 20 सितंबर तक श्रीमद्भागवत ज्ञान सप्ताह का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान 108 वेदपाठी विद्वानों द्वारा 108 भागवत मूल पाठ का आयोजन किया जाएगा।
कार्यक्रम में संतों, चातुर्मास समिति के पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।
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